Hormuz Strait Oil Crisis : ईरान-इजरायल तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर संकट गहराने की आशंका। S&P Global की रिपोर्ट में चेतावनी—अगर आपूर्ति बाधित हुई तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर सकता है। जानें पूरी रिपोर्ट और वैश्विक असर।
Hormuz Strait Oil Crisis : क्या कहती है S&P Global की रिपोर्ट?

वैश्विक रेटिंग और विश्लेषण एजेंसी S&P Global ने अपनी ताजा रिपोर्ट में आगाह किया है कि यदि Strait of Hormuz में तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित होती है, तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अब तक की सबसे बड़ी रुकावट बन सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से केवल 5 तेल टैंकर गुजरे, जबकि सामान्य दिनों में औसतन 60 टैंकर रोजाना यहां से गुजरते हैं। यह गिरावट बाजार में असामान्य तनाव का संकेत देती है।
Hormuz Strait Oil Crisis : क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। जनवरी और फरवरी 2026 में इस रास्ते से प्रतिदिन लगभग 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद की आवाजाही हुई। इसमें से 82% आपूर्ति एशियाई देशों को गई। अगर यह मार्ग एक सप्ताह तक भी बाधित रहता है, तो इसे वैश्विक ऊर्जा इतिहास की बड़ी घटनाओं में गिना जाएगा।
Hormuz Strait Oil Crisis : 100 डॉलर के पार जा सकते हैं दाम?
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कई महीनों तक रोजाना लगभग 70 लाख बैरल की आपूर्ति में कमी बनी रहती है, तो बाजार में भारी असंतुलन पैदा हो सकता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर जा सकती है। जिन देशों के पास रणनीतिक भंडार कम हैं, वहां कीमतों का असर ज्यादा दिखेगा। ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को भारी आर्थिक झटका लग सकता है। हालांकि, यदि हालात सामान्य हो जाते हैं और आपूर्ति फिर से पटरी पर लौटती है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के मध्य स्तर पर स्थिर रह सकती हैं।

Hormuz Strait Oil Crisis : शॉर्ट टर्म में कैसी रहेगी बाजार की चाल?
रिपोर्ट के अनुसार, निकट अवधि में बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की घबराहट, भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई को लेकर आशंकाएं ये सभी कारक कीमतों को अचानक ऊपर-नीचे कर सकते हैं।
Hormuz Strait Oil Crisis : ईरान-इजरायल तनाव का सीधा असर
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और विशेष रूप से Iran की संभावित भूमिका को लेकर वैश्विक बाजार सतर्क है। यदि अमेरिका-ईरान टकराव बढ़ता है या तेल निर्यात पर कोई प्रतिबंध लगता है, तो इसका सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ेगा।

Hormuz Strait Oil Crisis : भारत और एशिया पर क्या होगा असर?
एशिया, खासकर भारत, चीन और जापान जैसे देश होर्मुज स्ट्रेट से आने वाले तेल पर काफी निर्भर हैं। कीमतों में उछाल से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संकट लंबा खिंचता है, तो वैश्विक मंदी की आशंका भी बढ़ सकती है।
Hormuz Strait Oil Crisis : होर्मुज स्ट्रेट पर मंडरा रहा संकट केवल क्षेत्रीय मसला नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। S&P Global की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अगर आपूर्ति में लंबी बाधा आई, तो कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के पार जाना मुश्किल नहीं होगा। फिलहाल बाजार की नजर मध्य-पूर्व के हालात और समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर टिकी है।