General MM Narvane Book Controversy: पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब ‘For Stars of Destiny’ को सेना और सरकार ने क्यों रोका? गलवान झड़प, चीन विवाद और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट से जुड़े पूरे विवाद को विस्तार से समझें।
General MM Narvane Book Controversy: क्यों रोकी गई पूर्व सेना प्रमुख की किताब?
General MM Narvane Book Controversy: पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर) की आत्मकथा ‘For Stars of Destiny’ इन दिनों देश की राजनीति और रणनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। संसद से लेकर मीडिया तक सवाल उठ रहे हैं कि आखिर भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने अपने ही पूर्व आर्मी चीफ की किताब को प्रकाशित होने से क्यों रोक दिया? इस पूरे विवाद की जड़ में है ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, 1923, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां।
General MM Narvane Book Controversy: किस बात का खुलासा करती है नरवणे की किताब?

जनरल नरवणे ने अपनी पुस्तक में गलवान घाटी की 15-16 जून 2020 की हिंसक झड़प, चीन के साथ हुए डिसएंगेजमेंट समझौते, और सीमा विवाद के दौरान सरकार व सेना के भीतर हुई बैठकों का सिलसिलेवार विवरण दिया है। किताब में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ हुई फोन कॉल्स और मीटिंग्स का जिक्र किया है। इसके अलावा कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और चाइना स्टडी ग्रुप (CSG) की बैठकों के विवरण भी शामिल हैं।
General MM Narvane Book Controversy: सेना और रक्षा मंत्रालय की आपत्ति क्या है?
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि किताब में सैन्य निर्णय लेने की प्रक्रिया, कमांडरों को दिए गए निर्देश, राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की प्रतिक्रिया का तरीका जैसी जानकारियां सार्वजनिक हो रही हैं, जो भविष्य में दुश्मन देशों के लिए रणनीतिक हथियार बन सकती हैं। सेना को आशंका है कि इससे चीन या पाकिस्तान यह समझ सकते हैं कि युद्ध या संकट के समय भारत की मिलिट्री और पॉलिटिकल लीडरशिप कैसे और कितनी तेजी से फैसले लेती है।

General MM Narvane Book Controversy: Official Secrets Act क्यों बना रोड़ा?
ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, 1923 के तहत रक्षा, खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े वर्तमान या पूर्व अधिकारी बिना अनुमति कोई भी संवेदनशील जानकारी प्रकाशित नहीं कर सकते। वर्ष 2021 में इस कानून को और सख्त कर दिया गया, जिसके बाद बिना क्लियरेंस किताब छापना कानूनन अपराध माना जाता है। इसी कानून के तहत रक्षा मंत्रालय ने सीधे जनरल नरवणे को नहीं, बल्कि पब्लिशिंग हाउस से पूरी किताब का ड्राफ्ट तलब कर लिया।
General MM Narvane Book Controversy: क्यों अब तक नहीं मिली हरी झंडी?
सूत्रों के मुताबिक किताब को अब थलसेना और CDS स्तर पर जांच के लिए भेजा गया है। अंतिम फैसला मौजूदा सेना प्रमुख या CDS को लेना है। अक्टूबर 2023 में किताब इसलिए भी रोकी गई क्योंकि उस वक्त पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ विवाद जारी था। हालांकि अक्टूबर 2024 में डिसएंगेजमेंट समझौता हुआ, लेकिन डि-एस्केलेशन और डि-इंडक्शन अभी बाकी है।
General MM Narvane Book Controversy: पहले भी लिखी गई हैं सेना प्रमुखों की किताबें
यह पहला मामला नहीं है। जनरल वीके सिंह और जनरल वीपी मलिक अपनी किताबें प्रकाशित कर चुके हैं। हालांकि अंतर यह है कि वीके सिंह के कार्यकाल में कोई युद्ध नहीं हुआ। वीपी मलिक ने कारगिल युद्ध पर किताब रिटायरमेंट के वर्षों बाद लिखी, जबकि नरवणे की किताब हालिया और जारी सीमा विवाद से जुड़ी है।

General MM Narvane Book Controversy: हेंडरसन-ब्रुक्स रिपोर्ट का उदाहरण
1962 के चीन युद्ध पर बनी हेंडरसन-ब्रुक्स रिपोर्ट आज तक डिक्लासिफाइड नहीं हुई, क्योंकि उसमें सेना की रणनीति और मूवमेंट का जिक्र है। सरकार का मानना है कि नरवणे की किताब भी उसी तरह राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
General MM Narvane Book Controversy: जनरल एमएम नरवणे की किताब पर रोक व्यक्तिगत नहीं, बल्कि रणनीतिक और कानूनी कारणों से जुड़ी है। जब तक सेना और रक्षा मंत्रालय यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि किताब से कोई संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं हो रही, तब तक ‘For Stars of Destiny’ का प्रकाशित होना मुश्किल दिख रहा है।