Gangaur Festival Varanasi : वाराणसी में आयोजित गणगौर सिंधारा कार्यक्रम में 200 महिलाओं और बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने राजस्थानी संस्कृति को जीवंत कर दिया। जानिए पूरे आयोजन की खास झलक।

Gangaur Festival Varanasi : वाराणसी के महमूरगंज स्थित शुभम् लॉन में गणगौर पर्व की अनुपम छटा उस समय देखने को मिली, जब श्री गवरजा माता उत्सव समिति द्वारा आयोजित सिंधारा कार्यक्रम में राजस्थान की लोक-संस्कृति सजीव हो उठी। गंगा तट की पावन धरती पर जब मरुधरा की परंपराएं उतरीं, तो पूरा वातावरण भक्ति, रंग और लोकजीवन की मिठास से भर गया। लगभग 200 महिलाओं और बच्चों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थानी संस्कृति का ऐसा जीवंत चित्र प्रस्तुत किया, जिसने काशी की फिजाओं को भी रंगीन बना दिया। हर प्रस्तुति में परंपरा, नारी शक्ति और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।

Gangaur Festival Varanasi : दीप प्रज्ज्वलन से हुआ भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ सायं 5 बजे एडीजी पुलिस पियूष मोडिया और विशिष्ट अतिथि स्वाति मित्तल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दीप की लौ के साथ ही वातावरण में श्रद्धा और सांस्कृतिक समर्पण का प्रकाश फैल गया। संस्था के अध्यक्ष कमल अग्रवाल और मंत्री राम बूबना ने स्वागत भाषण में कहा कि गणगौर केवल एक पर्व नहीं, बल्कि स्त्री-श्रद्धा, प्रेम और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है।

Gangaur Festival Varanasi : सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत “मोरया रे… गणपति बप्पा मोरया” से हुई, जिसके बाद “ओम नमः शिवाय”, “गोविंद बोलो हरे गोपाल बोलो” और “नारी हूं मैं…” जैसे गीतों ने आध्यात्मिक और सामाजिक संदेशों का सुंदर समावेश प्रस्तुत किया। “बुम्बरों बुम्बरो”, “ईसर जी की बारात” और “गणगौर तब से अब तक” जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को सतयुग से आधुनिक युग तक की सांस्कृतिक यात्रा का अनुभव कराया। रंग-बिरंगे घाघरा-चुन्नी और पारंपरिक साफों ने माहौल को पूरी तरह राजस्थानी रंग में रंग दिया।

Gangaur Festival Varanasi : 21 मार्च को निकलेगी भव्य शोभायात्रा
समिति के प्रचारमंत्री गौरव राठी ने जानकारी दी कि 21 मार्च को काशी गौशाला, गोलघर से लक्ष्मीकुण्ड स्थित श्री श्याम मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की।
Gangaur Festival Varanasi : मंत्री का संदेश बना भावनात्मक केंद्र

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उनका संदेश समारोह का भावनात्मक केंद्र बन गया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मां गवरजा का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए—इसी कामना के साथ उन्होंने सभी को शुभकामनाएं दीं।
Gangaur Festival Varanasi : कार्यक्रम में गणमान्य लोगों की उपस्थिति

कार्यक्रम का संचालन दीपक माहेश्वरी, पवन कुमार अग्रवाल, प्रीति बाजोरिया, ऋतु धूत, शानू जाजोदिया और पूजा चाण्डक ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अजय खेमका ने प्रस्तुत किया, जबकि अतिथियों का स्वागत लाला चांडक द्वारा किया गया। इस अवसर पर कमल अग्रवाल, राम बूबना, आर. के. चौधरी, लोकेन्द्र करवा, उमाशंकर अग्रवाल, नवरतन राठी, पवन मोदी, दीपक बजाज, शंकरलाल सोमानी, गौरीशंकर नेवर, संजीव शाह, मांगीलाल सारडा, जेठमल चाण्डक, गौरव राठी, अनूप सर्राफ, ओमकार महेश्वरी, वेदमूर्ति शास्त्री, कौशल खण्डेलवाल, अशोक वर्मा, किशोर मुंदडा, कमलेश अग्रवाल, श्याम सुन्दर गाडोदिया, योगेश भुरारिया, गिरीराज कोठारी ,अजय काबरा गोविंद बजाज मदन मोहन अग्रवाल, सहित अनेक गणमान्य नागरिक और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन की भव्यता और सांस्कृतिक महत्व की सराहना की।
Gangaur Festival Varanasi : गणगौर का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह काशी और राजस्थान के सांस्कृतिक संगम का जीवंत उदाहरण बन गया। इसने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, जो हर परंपरा को अपनाकर उसे और समृद्ध बनाती है।