Ganesh Chaturthi 2025 Varanasi : शिव की नगरी काशी गणेश चतुर्थी के अवसर पर बप्पा के जयकारों से गूंज उठी। बुधवार को श्रीगणेश का आह्वान कर प्राण-प्रतिष्ठा के साथ 10 दिवसीय उत्सव का शुभारंभ हुआ। वाराणसी के मंदिरों और पंडालों में विशेष पूजन-अर्चन किए गए।
शहर में तीन स्थानों पर मुंबई के लालबाग के राजा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गईं। वहीं उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी 16 फीट ऊंची प्रतिमा खोजवां पुस्तकालय भवन में गणपति स्पोर्टिंग क्लब द्वारा स्थापित की गई, जिसमें गणेश जी बंसी बजाते हुए विराजमान हैं। प्रतिमा में ऋद्धि गणेश जी का हाथ दबाते और सिद्धि आरती उतारती दिखाई दे रही हैं, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
परंपरा और भक्ति का संगम
ब्रह्माघाट पर 228 साल पुरानी परंपरा निभाई गई।
ठठेरी बाजार स्थित शेरवाली कोठी में शीशमहल में लालबाग के राजा की प्रतिमूर्ति स्थापित हुई।
मछोदरी स्थित श्रीकाशी विद्या मंदिर में संगमरमर और अष्टधातु की प्रतिमाओं के साथ गणपति महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
श्री रामतारक आंध्रा आश्रम (मानसरोवर) में पंचधातु की मूर्ति के साथ 39वां गणेश नवरात्र महोत्सव शुरू हुआ।
अगस्त्यकुंडा स्थित शारदा भवन में 97वें गणेशोत्सव की शुरुआत हुई।
गढ़वासी टोला श्री सिद्धिविनायक मंदिर में 5 दिवसीय गणेश उत्सव का आरंभ हुआ।
बीएचयू आईआईटी परिसर में भी लालबाग के राजा की प्रतिमा स्थापित हुई।
प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, समिति अध्यक्ष आनंद राव सूर्यवंशी सहित कई पदाधिकारियों ने पूजा-अर्चना कर महाआरती की। वहीं मेयर अशोक कुमार तिवारी ने भी गणेश प्रतिमाओं के दर्शन किए।
भक्तिमय वातावरण
पूरे शहर में गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजते रहे। नमामि गंगे की ओर से बड़े गणेश मंदिर में पंच देवताओं के साथ गणेश जी की आरती उतारी गई। वैदिक मंगलाचरण, लक्षार्चन और गणेश अर्थवशीर्ष सहस्त्रावर्तन अनुष्ठान ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया।