Chandra Grahan 2026 : 50 मिनट तक रहेगा चंद्रग्रहण, इसके बाद शुरू होगा सूतक; जानें होलिका दहन का सही समय

Chandra Grahan 2026 : फाल्गुन पूर्णिमा पर 50 मिनट का चंद्रग्रहण काशी में दिखाई देगा। जानें सूतक काल कब से लगेगा, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है और 2026 में होली कब मनाई जाएगी। पूरी ज्योतिषीय जानकारी पढ़ें।

Chandra Grahan 2026 : वाराणसी। फाल्गुन पूर्णिमा पर इस वर्ष पड़ रहा खंड चंद्रग्रहण होली के उत्सव को विशेष बना रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण के कारण रंगोत्सव की तिथि में परिवर्तन किया गया है। चंद्रग्रहण मंगलवार को होने के कारण रंगों की होली अब बुधवार, 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी, जबकि होलिका दहन 2 मार्च की मध्यरात्रि में होगा।

Chandra Grahan 2026 : दोपहर से शुरू होगा ग्रहण, काशी में 50 मिनट दिखेगा प्रभाव

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चंद्रग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:48 बजे तक रहेगा। हालांकि भारत में यह ग्रस्तोदित ग्रहण होगा, यानी चंद्रमा ग्रहण लगे हुए ही उदित होगा।

काशी में चंद्रोदय: सायं 5:58 बजे

ग्रहण समाप्ति: 6:48 बजे

कुल दृश्य अवधि: 50 मिनट

देश के पूर्वोत्तर राज्यों के अतिरिक्त पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान में ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा।

Chandra Grahan 2026 : सुबह 8:58 बजे से लगेगा सूतक काल

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण के दृश्य होने से 9 घंटे पूर्व लग जाता है। काशी में ग्रहण 5:58 बजे दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल प्रातः 8:58 बजे से प्रभावी माना जाएगा।

Chandra Grahan 2026 : सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?

जप, तप, हवन और मंत्र जाप करना शुभ

मंदिरों के कपाट कई स्थानों पर बंद

भोजन पकाने और शुभ कार्यों से परहेज

Chandra Grahan 2026 : गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी

श्रीकाशी विद्वत परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार ग्रहण और मोक्ष काल में स्नान का विशेष महत्व है। इस दौरान सभी जल गंगाजल के समान पवित्र माने जाते हैं।

Chandra Grahan 2026 : भद्रा पुच्छ में होगा होलिका दहन

ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है, लेकिन भद्रा पुच्छ में दहन किया जा सकता है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त:

रात 12:50 बजे से 2:02 बजे तक (2 मार्च की मध्यरात्रि)

तिथियों का विवरण:
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा प्रारंभ: 2 मार्च, सायं 5:18 बजे
पूर्णिमा समाप्त: 3 मार्च, शाम 4:33 बजे
चैत्र कृष्ण प्रतिपदा: 4 मार्च, शाम 4:15 बजे तक
इसी कारण रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

Chandra Grahan 2026 : धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है यह ग्रहण?

चंद्रग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से आत्मचिंतन और साधना का समय माना जाता है। काशी जैसे धार्मिक नगर में गंगा तटों पर स्नान, दान और जप का विशेष महत्व होता है। धर्माचार्यों के अनुसार ग्रहण काल में किया गया मंत्र जाप कई गुना फलदायी होता है।

Chandra Grahan 2026 : इस वर्ष होली का पर्व खगोलीय घटनाओं के कारण विशेष बन गया है। 50 मिनट के चंद्रग्रहण के साथ सूतक काल और भद्रा पुच्छ के संयोजन ने पर्व की तिथि और मुहूर्त में परिवर्तन कर दिया है। श्रद्धालुओं को ज्योतिषीय निर्देशों के अनुसार ही होलिका दहन और रंगोत्सव मनाने की सलाह दी गई है।

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