Basant Panchami Kashi : मां सरस्वती की आराधना और गंगा स्नान- बसंत पंचमी पर काशी में श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

Basant Panchami Kashi : बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुक्रवार तड़के से ही काशी के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। माघ मास के इस महत्वपूर्ण स्नान पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया और मां सरस्वती की आराधना कर जीवन में सुख, समृद्धि और ज्ञान की कामना की।

Basant Panchami Kashi : भोर से ही दशाश्वमेध, अस्सी, पंचगंगा, राजघाट सहित प्रमुख घाटों पर हर-हर गंगे और मां सरस्वती के जयकारे गूंजते रहे। पीले वस्त्रों में सजे श्रद्धालु, हाथों में पीले फूल, फल और मिष्ठान लिए घाटों की ओर बढ़ते नजर आए। पूरे घाट क्षेत्र में भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

Basant Panchami Kashi : माघ स्नान और सरस्वती वंदना का विशेष महत्व

गंगा घाटों के पुरोहित अजय कुमार तिवारी ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन माघ स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन विशेष रूप से माताएं और बहनें मां सरस्वती की आराधना के लिए घरों से निकलती हैं। श्रद्धालु पीले रंग के वस्त्र धारण कर मां गंगा में स्नान करते हैं और उसके बाद मां सरस्वती को पीले फूल, फल, चावल और मिष्ठान अर्पित कर दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान, जप-तप और दान जीवन में विद्या, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

Basant Panchami Kashi : काशी की महिलाओं की विशेष परंपरा

गंगा स्नान के पश्चात काशी की महिलाएं ऋतु फल अर्पित कर भगवान को भोग लगाती हैं और अपने दिन की शुभ शुरुआत करती हैं। घर-घर में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर हवन-पूजन किया जा रहा है। बच्चे अपनी किताबें, वाद्य यंत्र और लेखन सामग्री मां के चरणों में रखकर विद्या में उन्नति की प्रार्थना कर रहे हैं।

Basant Panchami Kashi : सुरक्षा और व्यवस्थाएं रहीं चाक-चौबंद

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई थी। घाटों पर पुलिस बल, जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं। स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया।

Basant Panchami Kashi : विद्या, कला और नव ऊर्जा का पर्व

बसंत पंचमी केवल स्नान पर्व ही नहीं, बल्कि विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन नई शुरुआत, सकारात्मक सोच और ज्ञान की साधना का प्रतीक माना जाता है। काशी में यह पर्व परंपरा, आस्था और संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

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