Ahilyabai Holkar contribution : अहिल्याबाई होलकर के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता : हंसराज विश्वकर्मा
Ahilyabai Holkar contribution : वाराणसी में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन विद्वानों ने रखे विचार
Ahilyabai Holkar contribution : अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के अवसर पर वाराणसी में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विद्वानों ने सनातन धर्म के संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुधार और मंदिरों के जीर्णोद्धार में उनके योगदान को रेखांकित किया।
Ahilyabai Holkar contribution : पुण्यश्लोक लोकमाता रानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित तथा महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ (महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ) एवं बिंदेश्वरी ग्रामोत्थान संस्थान, अमेठी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार को अहिल्याबाई होलकर के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक योगदान पर गहन चर्चा की गई।
कार्यक्रम का आयोजन काशी विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र संकाय स्थित ज्योतिबा फुले सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा (बिहार) की पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने की।

Ahilyabai Holkar contribution : सनातन संस्कृति की रक्षा में अहिल्याबाई की भूमिका
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बचाने में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का योगदान अमूल्य और ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होलकर ने सामाजिक सुधार, राष्ट्र निर्माण, आध्यात्मिक चेतना और मंदिरों के संरक्षण के क्षेत्र में जो कार्य किए, वे आज भी प्रेरणास्रोत हैं।
प्रो. सिंह ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर ने सामाजिक बंधनों को तोड़कर यह संदेश दिया कि श्रेष्ठ बनने के लिए कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। उन्होंने सती प्रथा जैसी कुप्रथा को समाप्त कर महिलाओं को नया जीवन और सम्मान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि अखंड भारत की चेतना, देशभर में मंदिरों का पुनर्निर्माण और धार्मिक स्थलों को पुनर्जीवित करने का श्रेय अहिल्याबाई होलकर को जाता है।
उन्होंने काशी विद्यापीठ की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान सत्याग्रही और संन्यासी दोनों को समान सम्मान देता है। उन्होंने कहा कि देश का एकमात्र भारत माता मंदिर काशी विद्यापीठ में स्थित है, जहां हर बार नई ऊर्जा और अनुभूति मिलती है।
Ahilyabai Holkar contribution : इतिहास से सीख लेने की आवश्यकता : हंसराज विश्वकर्मा
मुख्य अतिथि एवं विधान परिषद सदस्य तथा भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष (वाराणसी) हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि हमें अपने इतिहास से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होलकर का जीवन त्याग, सेवा और विकास का प्रतीक है। जिस प्रकार उन्होंने सामाजिक और क्षेत्रीय विकास किया, उसी तरह आज देश के प्रधानमंत्री भी राष्ट्र के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं।
Ahilyabai Holkar contribution : अहिल्याबाई होलकर शिवभक्त और दूरदर्शी शासिका थीं : प्रो. उमापति दीक्षित
विशिष्ट अतिथि केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के प्रो. उमापति दीक्षित ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर महान शिवभक्त थीं और शिव तत्व उनके जीवन को दिशा देता था। उन्होंने कहा कि काशी के घाटों पर आज भी अहिल्याबाई होलकर का नाम अंकित है, जो उनके योगदान का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई कुतर्क नहीं बल्कि विकास और सकारात्मक परिवर्तन को स्वीकार करने वाली शासिका थीं।
Ahilyabai Holkar contribution : अहिल्याबाई का जीवन अविस्मरणीय : हरेंद्र प्रताप सिंह
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं पूर्व संपादक हरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर केवल एक नाम नहीं बल्कि आत्मीय स्वतंत्रता और सेवा भाव का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि अहिल्या का अर्थ ही उनके जीवन उद्देश्य को परिभाषित करता है। उन्होंने सती प्रथा को तोड़कर समाज को नई दिशा दी, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
Ahilyabai Holkar contribution : महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार की प्रतीक
काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्रो. अनुराधा सिंह ने अहिल्याबाई होलकर के जीवन को रेखांकित करते हुए महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक स्वास्थ्य और दूरदर्शिता पर उनके योगदान को विस्तार से बताया। वहीं प्रो. श्रद्धा सिंह ने कविता के माध्यम से शिवभक्ति, पारिवारिक जीवन, आत्मनिर्भरता और स्त्री उत्थान के संदर्भ प्रस्तुत किए।

Ahilyabai Holkar contribution : सांस्कृतिक कार्यक्रम में नाट्य प्रस्तुति
संगोष्ठी के उपरांत नाट्य कला विभाग के विद्यार्थियों द्वारा ‘हमारी अहिल्या, काशी की अहिल्या’ नाटक की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में स्वागत बिंदेश्वरी ग्रामोत्थान संस्थान के बिंदेश्वरी दुबे ने किया। संचालन डॉ. अमित कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने किया।
Ahilyabai Holkar contribution : स्वागत बिंदेश्वरी ग्रामोत्थान संस्थान के बिंदेश्वरी दुबे, संचालन डॉ. अमित कुमार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. रमाकांत सिंह, डॉ. शुभ्रा, डॉ. प्रभा शंकर मिश्र, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. नागेंद्र पाठक, डॉ. जय प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. शिवजी सिंह, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. शिव यादव, डॉ. वैष्णवी शुक्ला, डॉ. चंद्रशील पाण्डेय, विजय सिंह, खुश्बू सिंह, अतुल उपाध्याय, प्रशांत शर्मा, पुलकित, जुली, रिया, अनुष्का, जान्हवी, कोमल, साजिया, स्वेता, शिवेंद्र, मनीष, वारिसा, हर्ष, पीयूष, लुकमान, वंशिका, दिशान आदि उपस्थित रहे।इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।