Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : मणिकर्णिका घाट से मिलीं मूर्तियां और कलाकृतियां होंगी संरक्षित, डीएम बोले- किसी मंदिर को नुकसान नहीं

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य के दौरान मिलीं मूर्तियां और कलाकृतियां संरक्षित की जाएंगी। डीएम सत्येंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि किसी मंदिर को नुकसान नहीं हुआ और निर्माण पूरा होने के बाद मूर्तियां पुनः स्थापित की जाएंगी।

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : मणिकर्णिका घाट पर मिलीं ऐतिहासिक मूर्तियां संरक्षित, प्रशासन ने दी सफाई

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य के दौरान मिलीं मूर्तियां और कलाकृतियां अब संरक्षित की जाएंगी। इस संबंध में फैले विवाद और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : डीएम सत्येंद्र कुमार का बयान

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य योजनाबद्ध तरीके से कराया जा रहा है। पहले चरण में घाट की सीढ़ियों का निर्माण किया जा रहा है। खुदाई के दौरान कुछ प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां सामने आई हैं, जिनमें लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा भी शामिल है। इन सभी को सुरक्षित स्थान पर संरक्षित कर लिया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन्हें पुनः घाट परिसर में विधिवत स्थापित किया जाएगा।

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद

मणिकर्णिका घाट का एक आठ सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें घाट पर बुलडोजर चलता नजर आ रहा है। वीडियो के साथ यह दावा किया गया कि “विकास के नाम पर मंदिर गिराए जा रहे हैं। ”वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। बनारस से लेकर इंदौर तक विरोध के स्वर उठने लगे। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही संरचनाएं दीवारों पर बनी चित्रकारी और कलात्मक अवशेष हैं, न कि कोई मंदिर।

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : पाल समाज समिति और स्थानीय लोगों का प्रदर्शन

वायरल वीडियो के बाद पाल समाज समिति के अध्यक्ष महेंद्र पाल अपने समर्थकों के साथ मणिकर्णिका घाट पहुंचे और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घाट के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है और ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वहीं जिला प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : पुनर्विकास योजना के तहत क्या-क्या बन रहा है ?

अधिकारियों के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं 32 शवदाह प्लेटफॉर्म, प्रदूषण रहित चिमनियां, दो सामुदायिक शौचालय, हरित क्षेत्र, पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण स्थल और प्रतीक्षा कक्ष शामिल है। यह पूरा निर्माण भूतल और प्रथम तल को मिलाकर किया जा रहा है।

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : इतिहासकारों और ट्रस्ट की आपत्ति

इतिहासकारों का मानना है कि देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा 1791 में निर्मित मणिकर्णिका घाट केवल एक संरचना नहीं बल्कि सनातन आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। खासगी ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रिंस रिचर्ड होलकर ने काशी प्रशासन को पत्र लिखकर प्रतिमाओं को सुरक्षित निकालकर ट्रस्ट को सौंपने की मांग की है।

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : इतिहासकारों की राय

प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. कैलाश चंद्र पांडेय का कहना है कि कार्य शुरू होने से पहले प्रतिमाओं को सुरक्षित कर लेना चाहिए था। वहीं डॉ. शिवनारायण यादव ने कहा कि विकास के नाम पर विरासत को नुकसान पहुंचाना गलत है।

Manikarnika Ghat Ahilyabai Statue Controversy : मणिकर्णिका घाट पर विकास और विरासत संरक्षण को लेकर विवाद जरूर गहराया है, लेकिन जिला प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया और सभी मूर्तियां व कलाकृतियां सुरक्षित हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन ऐतिहासिक धरोहरों को पुनः सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा।

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