Bangladesh Violence After Sharif Osman Hadi Murder : उस्मान हादी की हत्या के बाद मीडिया पर हमला, 27 साल में पहली बार नहीं छपा ‘प्रथम आलो’

Bangladesh Violence After Sharif Osman Hadi Murder : बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद भड़की हिंसा में उग्र भीड़ ने प्रथम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों में आग लगा दी। 27 साल में पहली बार प्रथम आलो अखबार नहीं छप सका, मीडिया स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल।

Bangladesh Violence : बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर राजनीतिक हिंसा की चपेट में आ गई है। युवा छात्र नेता और राजनीतिक मंच इंक़िलाब मंच के संयोजक शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद भड़की हिंसा में उग्र भीड़ ने देश के दो सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों — प्रथम आलो और द डेली स्टार — के दफ्तरों में आग लगा दी। इस हमले के कारण बांग्लादेश का सबसे बड़ा अखबार प्रथम आलो 27 वर्षों में पहली बार प्रकाशित नहीं हो सका। घटना 12 दिसंबर की है, जब सिर में गोली लगने से घायल हादी की इलाज के दौरान सिंगापुर में मौत हो गई। उनकी मौत की खबर फैलते ही ढाका समेत कई शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठे।

Bangladesh Violence : मीडिया दफ्तरों पर हमला, पत्रकारों में दहशत

प्रथम आलो के एग्जीक्यूटिव एडिटर सज्जाद शरीफ ने इस घटना को बांग्लादेशी पत्रकारिता के इतिहास की “सबसे काली रात” करार दिया। उन्होंने बताया कि जब पत्रकार अगले दिन के अखबार और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए काम कर रहे थे, तभी सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने आधी रात के आसपास मीडिया हाउस पर हमला कर दिया। हमलावरों ने दफ्तरों में जमकर तोड़फोड़ की, फर्नीचर और उपकरणों को आग के हवाले कर दिया। हालात इतने भयावह थे कि कर्मचारियों को अपनी जान बचाने के लिए दफ्तर छोड़कर भागना पड़ा। इस हमले के बाद न सिर्फ अखबार का प्रिंट संस्करण रुक गया, बल्कि प्रथम आलो की वेबसाइट भी बंद हो गई।

Bangladesh Violence : 27 साल में पहली बार नहीं छपा अखबार

सज्जाद शरीफ ने कहा कि 1998 में स्थापना के बाद यह पहली बार है जब प्रथम आलो प्रकाशित नहीं हो सका। यह सिर्फ हमारे संस्थान पर नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है । उन्होंने सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

Bangladesh Violence : कौन थे शरीफ उस्मान हादी ?

32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता थे। वह ‘जुलाई आंदोलन’ से उभरकर सामने आए। इंक़िलाब मंच के संयोजक और प्रवक्ता, ढाका विश्वविद्यालय से शिक्षित, पारंपरिक, राजनीतिक दलों और अवामी लीग के मुखर आलोचक थे । बताया गया है कि हादी आगामी चुनावों के लिए अपने राजनीतिक अभियान की शुरुआत कर रहे थे, तभी मोतिझील इलाके में रिक्शा में सवार रहते हुए नकाबपोश हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। गोली उनके बाएं कान के पास लगी, जिससे वह कोमा में चले गए और छह दिन बाद सिंगापुर में उनकी मौत हो गई।

Bangladesh Violence : हत्याकांड पर सस्पेंस बरकरार

बांग्लादेश पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हत्या के पीछे कौन है और मकसद क्या था। अंतरिम मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने हादी की मौत की पुष्टि की, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए।

Bangladesh Violence : चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक अस्थिरता

हादी की मौत ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी कर रहा है और भारत के साथ अपने संबंधों को पुनः संतुलित करने की कोशिश में है। हिंसक प्रदर्शनों में न सिर्फ मीडिया, बल्कि सरकारी और राजनीतिक प्रतिष्ठानों से जुड़े प्रतीकों को भी निशाना बनाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि मीडिया पर हमला लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है और यह देश की राजनीतिक अस्थिरता को और गहरा कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *