DM vs Police Commissioner: जानें किसके पास ज्यादा पावर, दोनों के अधिकार, जिम्मेदारियां, कामकाज, सैलरी और इन पदों तक कैसे पहुंचते हैं। आसान भाषा में पूरा फर्क समझें।
DM vs Police Commissioner : डीएम और पुलिस कमिश्नर में कौन ज्यादा पावरफुल? पूरा सच जानें
DM vs Police Commissioner : देश में प्रशासनिक पदों को लेकर आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर डीएम (District Magistrate) और पुलिस कमिश्नर (Police Commissioner) में से किसके पास ज्यादा शक्ति होती है। दोनों ही पद बेहद प्रतिष्ठित और प्रभावशाली माने जाते हैं, लेकिन इनके काम और अधिकार एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं।

DM vs Police Commissioner : चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं—
डीएम (District Magistrate) – जिले का सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी
कौन होते हैं डीएम
डीएम एक IAS अधिकारी होते हैं और किसी जिले के मुख्य प्रशासक (Head of District Administration) माने जाते हैं।
DM vs Police Commissioner : डीएम की मुख्य जिम्मेदारियां
कानून-व्यवस्था की निगरानी
धारा 144 लागू करने का अधिकार
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन
राजस्व और भूमि संबंधी प्रशासन
चुनाव संचालन, आपदा प्रबंधन एवं विकास कार्यों की मॉनिटरिंग
जिले में लगभग सभी विभाग डीएम को रिपोर्ट करते हैं।

DM vs Police Commissioner : कितने पावरफुल होते हैं डीएम
डीएम जिले में अंतिम प्रशासनिक प्राधिकारी होते हैं।
किसी भी विकास कार्य, सरकारी निर्णय या प्रशासनिक कार्रवाई में उनका अंतिम हस्ताक्षर आवश्यक होता है।
पुलिस कमिश्नर – महानगरों में सबसे शक्तिशाली पुलिस अधिकारी
DM vs Police Commissioner : कौन होते हैं पुलिस कमिश्नर
पुलिस कमिश्नर एक IPS अधिकारी होते हैं और कमिश्नरेट सिस्टम में शहर के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी होते हैं।
DM vs Police Commissioner : कमिश्नर के पास विशेष शक्तियां

एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट पावर
(यानी वे बिना डीएम की अनुमति के कई तत्काल फैसले ले सकते हैं)
धारा 107/116/144 जैसे कानून सीधे लागू कर सकते हैं
अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक, VIP सुरक्षा, इंटेलिजेंस सब उन्हीं के अधीन
SP, DCP सहित सभी पुलिस अधिकारी कमिश्नर को रिपोर्ट करते हैं।
DM vs Police Commissioner : कब होता है कमिश्नर ज्यादा पावरफुल
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में कमिश्नर की शक्तियां डीएम से ज्यादा होती हैं, क्योंकि कानून-व्यवस्था का पूरा नियंत्रण उन्हीं के हाथ में होता है।
आखिर कौन है ज्यादा पावरफुल – डीएम या पुलिस कमिश्नर
DM vs Police Commissioner : जिले में — डीएम अधिक शक्तिशाली
क्योंकि विकास, प्रशासनिक फैसले, धारा 144, राजस्व, कानून-व्यवस्था में अंतिम अधिकार डीएम के पास होता है।
महानगरों में — पुलिस कमिश्नर ज्यादा शक्तिशाली
क्योंकि कमिश्नर के पास मजिस्ट्रेट पावर + पुलिस का पूर्ण नियंत्रण होता है।
वे तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं, जबकि डीएम सिर्फ सिविल प्रशासन देखते हैं।
जिले में डीएम ज्यादा पावरफुल
बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नर ज्यादा पावरफुल
दोनों पद अलग-अलग क्षेत्रों में सर्वोच्च माने जाते हैं और एक-दूसरे के सहयोग से ही प्रशासन चलता है।
डीएम और पुलिस कमिश्नर बनने का रास्ता

DM vs Police Commissioner : कैसे बनते हैं डीएम
- UPSC सिविल सेवा परीक्षा (IAS) पास करनी होती है
- IAS अधिकारी के रूप में 5–6 साल अनुभव
- इसके बाद किसी जिले का डीएम बनाया जाता है
DM vs Police Commissioner : कैसे बनते हैं पुलिस कमिश्नर
- UPSC से IPS अधिकारी बनना
- ASP, SP, DIG जैसी पोस्ट पर अनुभव
- राज्य सरकार द्वारा कमिश्नर नियुक्त किए जाते हैं
DM vs Police Commissioner : दोनों के वेतन और सुविधाएं
डीएम (IAS) सैलरी
बेसिक पे: लगभग ₹78,800 – ₹2,18,200
सुविधाएं: सरकारी बंगला, स्टाफ, वाहन, सुरक्षा, मेडिकल
पुलिस कमिश्नर (IPS) सैलरी
रैंक के अनुसार: IGP / ADG / DGP ग्रेड
सैलरी: ₹1,44,200 – ₹2,25,000 तक
सुविधाएं: सुरक्षा कर्मी, वाहन, स्टाफ, कैंप ऑफिस