Supreme Court judgment on promise of marriage : सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2025 को एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला शादी के वादे पर अपनी सहमति से शारीरिक संबंध बनाती है, तो उसे बलात्कार (Rape) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
यह फैसला कुनाल चटर्जी बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल मामले से जुड़ा हुआ है। आरोप था कि आरोपी युवक ने पीड़िता से तब संबंध बनाए जब वह 15 वर्ष की थी और उससे शादी करने का वादा किया था। हालांकि एफआईआर करीब तीन साल बाद तब दर्ज कराई गई जब पीड़िता वयस्क हो चुकी थी। जांच में न तो कोई फोरेंसिक सबूत मिला और न ही आरोपों की पुष्टि करने वाले अन्य प्रमाण।
न्यायमूर्ति सुदांशु धूलिया और अरविंद कुमार की बेंच ने कहा कि हर मामले में शादी का वादा कर बनाए गए संबंध को बलात्कार मानना उचित नहीं है। यदि संबंध महिला की स्वेच्छा और सहमति से बने हों, तो उन्हें अपराध नहीं ठहराया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि POCSO Act जैसे कठोर कानूनों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। अदालतों को हर मामले में सहमति की प्रकृति और परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए।
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि मामला निराधार है और इसलिए एफआईआर व पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।