BHU Vice-Chancellor Ajit Kumar Chaturvedi : बीएचयू को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का संकल्प-कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी

BHU Vice-Chancellor Ajit Kumar Chaturvedi : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के नव नियुक्त कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा है कि विश्वविद्यालय के सभी सदस्यों को, जिनमें वे स्वयं भी शामिल हैं, मिलकर कड़ी मेहनत करनी होगी ताकि सोच-समझकर यथोचित निर्णय लिए जा सकें।

केंद्रीय कार्यालय के समिति कक्ष-1 में आयोजित अपनी पहली प्रेस वार्ता में प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि “संवेदनशीलता, संवाद और समन्वय” किसी भी संस्था के प्रभावी संचालन के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने बीएचयू समुदाय से आह्वान किया कि विश्वविद्यालय को देश और विदेश के प्रतिभाशाली छात्रों और शिक्षकों की पहली पसंद बनाया जाए।

बीएचयू की ताकत: विरासत, विविधता और अवसर

प्रो. चतुर्वेदी ने बीएचयू की विशालता, विषयों की विविधता और समृद्ध परंपरा को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि यदि सभी सदस्य एक साझा लक्ष्य के साथ काम करें — यानी बीएचयू को वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर सर्वोच्च स्थान दिलाना — तो कई उपलब्धियाँ संभव हैं।

अनुसंधान और नवाचार पर जोर

नव नियुक्त कुलपति ने बीएचयू के मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना करते हुए कहा कि इसे और सशक्त बनाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने पेटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग बढ़ाया जाएगा।

शिक्षकों और छात्रों की भूमिका

प्रो. चतुर्वेदी ने शिक्षकों से अपील की कि वे कक्षा में छात्रों के सवालों को गंभीरता से सुनें और उत्तर दें। उन्होंने कहा कि संस्था की छवि में हर वर्ग की भूमिका होती है — चाहे वे छात्र हों, शिक्षक या कर्मचारी।

वैश्विक पूर्व छात्रों से जुड़ाव

उन्होंने कहा कि बीएचयू के पूर्व छात्र दुनियाभर में फैले हुए हैं और संस्थान से गहरा भावनात्मक संबंध रखते हैं। विश्वविद्यालय को उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए ईमानदार प्रयास करने होंगे।

बीएचयू से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि भले ही उन्होंने अपना अधिकांश पेशेवर जीवन आईआईटी संस्थानों में बिताया है, लेकिन बीएचयू लौटना उनके लिए एक भावनात्मक क्षण है, क्योंकि यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई थी।

प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने स्पष्ट कर दिया है कि बीएचयू का भविष्य सामूहिक प्रयासों से संवर सकता है। उनकी प्राथमिकताएं अनुसंधान, संवाद, नवाचार और संस्थान की वैश्विक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करना हैं। आने वाले समय में विश्वविद्यालय के कार्यों और नीतियों पर सबकी नजरें होंगी।

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