Melodies of Moonlight Varanasi : वाराणसी में कला प्रकाश की ओर से शरद पूर्णिमा पर आयोजित ‘मेलोडीज ऑफ मूनलाइट’ में डॉ. अविनाश कुमार और डॉ. रिन्दाना रहस्य ने राग मधुवन्ती, जोगकौंस और जसरंगी शास्त्रीय गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
Melodies of Moonlight Varanasi : शरद पूर्णिमा पर ‘मेलोडीज ऑफ मूनलाइट’ में गूंजी शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वर लहरियां
Melodies of Moonlight Varanasi : कला प्रकाश के आयोजन में डॉ. अविनाश कुमार और डॉ. रिन्दाना रहस्य ने दी जसरंगी शास्त्रीय गायन की मनमोहक प्रस्तुति, देशी-विदेशी संगीत प्रेमी हुए मंत्रमुग्ध
Melodies of Moonlight Varanasi : वाराणसी। शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुरों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कला प्रकाश की ओर से सामने घाट स्थित होटल अविरल गंगा के प्रांगण में शरद पूर्णिमा के अवसर पर सांगीतिक कार्यक्रम ‘मेलोडीज ऑफ मूनलाइट’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित दिल्ली के प्रतिभाशाली युवा गायक कलाकार युगल डॉ. अविनाश कुमार एवं डॉ. रिन्दाना रहस्य ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों का मन मोह लिया। रागों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति, सुरों की शुद्धता और शास्त्रीय गायन की विविधता ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया।
Melodies of Moonlight Varanasi : कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रिन्दाना रहस्य के गायन से हुआ। उन्होंने राग मधुवन्ती में विलंबित ख्याल ‘सुनिये नाथ’ प्रस्तुत कर शास्त्रीय संगीत की गंभीरता और राग के भावपक्ष को खूबसूरती से उकेरा। इसके बाद इसी राग में तीनताल की द्रुत बंदिश ‘उनसो मोरी लगन लागी’ का गायन किया। उनकी प्रस्तुति में राग की मधुरता और लयकारी का सुंदर समन्वय देखने को मिला। श्रोताओं ने उनकी गायकी का आनंद लेते हुए तालियों से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
इसके बाद डॉ. अविनाश कुमार ने राग जोगकौंस में अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने पारंपरिक विलंबित ख्याल ‘सुघर वर पायो’ और द्रुत ख्याल ‘पीर पराई’ का सुमधुर गायन किया। दोनों रचनाओं के माध्यम से उन्होंने राग की विशिष्टता, भावों की गहराई और शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी गायकी ने श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।
Melodies of Moonlight Varanasi : कार्यक्रम का विशेष आकर्षण कलाकार युगल की संयुक्त प्रस्तुति रही। डॉ. अविनाश कुमार और डॉ. रिन्दाना रहस्य ने एक साथ राग चन्द्रकौंस एवं मधुकौंस में जसरंगी शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। दोनों कलाकारों की स्वर-साधना और आपसी सामंजस्य ने इस प्रस्तुति को विशिष्ट बना दिया। शरद पूर्णिमा की चांदनी और रागों की मधुरता के बीच यह जुगलबंदी कार्यक्रम का यादगार क्षण बनी।
Melodies of Moonlight Varanasi : संयुक्त गायन के अंतर्गत कलाकारों ने विलंबित रूपक ताल में रचना ‘मधु चन्द्र की रोशनी’ प्रस्तुत की। इसके बाद तीनताल की बंदिश ‘आई चांदनी शरद की’ के साथ अपने गायन का समापन किया। शरद पूर्णिमा की भावभूमि से जुड़ी इन रचनाओं ने कार्यक्रम के नाम और अवसर को सार्थकता प्रदान की। श्रोताओं ने प्रस्तुतियों की सराहना की और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
Melodies of Moonlight Varanasi : कार्यक्रम में तबले पर सिद्धार्थ चक्रवर्ती और आनंद मिश्र ने कुशल संगत की, जबकि हारमोनियम पर मोहित साहनी ने अपनी संगत से गायन को प्रभावी बनाया। संगतकारों ने कलाकारों के साथ सुर और ताल का सुंदर संतुलन बनाए रखा, जिससे प्रस्तुतियों की संगीतमयता और निखरकर सामने आई।
इस अवसर पर मधु केजरीवाल, पं. अनूप मिश्र, पं. बिरेन्द्रनाथ मिश्र, अभिजित अग्रवाल तथा पं. रबिन्द्र नारायण गोस्वामी ने कलाकारों का स्वागत किया। अशोक कपूर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशीष जायसवाल ने किया, जबकि संयोजन की जिम्मेदारी डॉ. अनुराधा रतूड़ी ने निभाई।
Melodies of Moonlight Varanasi : कार्यक्रम में डॉ. अतुल्य रतन, डॉ. उन्मेश चक्रवर्ती, अरविन्द अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, संगीत प्रेमी तथा बड़ी संख्या में देशी-विदेशी श्रोता उपस्थित रहे। शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस सांगीतिक संध्या ने वाराणसी की समृद्ध संगीत परंपरा और भारतीय शास्त्रीय गायन की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।