Mann Ki Baat 12 Years : मन की बात के 12 साल पूरे- PM मोदी ने दिवाली-छठ पर स्वच्छता और स्वदेशी अपनाने की अपील की

Mann Ki Baat 12 Years : मन की बात के 139वें एपिसोड में पीएम नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम के 12 साल पूरे होने पर इसे तीर्थयात्रा बताया। दिवाली-छठ पर स्वच्छता, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण की अपील की।

Mann Ki Baat 12 Years : मन की बात के 12 साल पूरे, PM मोदी बोले- मेरे लिए किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं यह सफर; दिवाली-छठ पर स्वच्छता और स्वदेशी अपनाने की अपील

Mann Ki Baat 12 Years : नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। कार्यक्रम के 12 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को अपने लिए किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं बताया। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से उन्हें देश के सामान्य नागरिकों के असाधारण कार्यों, उनके परिश्रम, साहस, समर्पण और सेवा भावना को करीब से जानने का अवसर मिला है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने दिवाली और छठ पर्व के मद्देनजर देशवासियों से स्वच्छता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत के स्थानीय उत्पाद अब वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड में हेवल नदी के पुनर्जीवन और पंजाब में पारंपरिक खेती एवं हस्तकला को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।

Mann Ki Baat 12 Years : 12 साल की यात्रा को बताया तीर्थयात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ की शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी के पावन अवसर पर हुई थी। तब से यह कार्यक्रम लगातार देशवासियों से संवाद का माध्यम बना हुआ है। उन्होंने इस यात्रा में साथ देने वाले सभी श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि देश के लोगों ने इस सफर में सहयात्री और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने भारतीय परंपरा में तीर्थयात्राओं के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए ‘मन की बात’ भी एक ऐसी यात्रा है, जिसके माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे अच्छे कार्यों को जानने और समाज के लिए योगदान देने वाले लोगों को सम्मान देने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे अनेक लोग हैं, जो बिना किसी प्रचार और स्वार्थ के समाज की सेवा में जुटे हुए हैं। कोई पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहा है, तो कोई पारंपरिक कला, स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहा है। ‘मन की बात’ ने ऐसे लोगों के कार्यों को देश के सामने लाने का महत्वपूर्ण काम किया है।

Mann Ki Baat 12 Years : दिवाली और छठ पर स्वच्छता बनाए रखने की अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी दिवाली और छठ पर्व का उल्लेख करते हुए लोगों से अपने घरों, मोहल्लों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान स्वच्छता का विशेष महत्व है और प्रत्येक नागरिक को अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्वों को याद करने का भी समय हैं। जब लोग व्यक्तिगत स्तर पर स्वच्छता का ध्यान रखते हैं और सामूहिक रूप से सफाई अभियान में भाग लेते हैं, तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

Mann Ki Baat 12 Years : प्रधानमंत्री ने प्रकृति और जल स्रोतों के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों, तालाबों और प्राकृतिक संसाधनों को विशेष महत्व दिया गया है। इनका संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है। पूर्वजों से मिली इस विरासत को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण छोड़ना सभी का दायित्व है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि त्योहारों के दौरान कचरा इधर-उधर न फेंकें, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखें और पर्यावरण के अनुकूल आदतों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

Mann Ki Baat 12 Years : ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूत बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्योहारों के अवसर पर देशवासियों से स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पाद खरीदने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से देश के छोटे कारोबारियों, ग्रामीण परिवारों और पारंपरिक व्यवसायों को आर्थिक मजबूती मिलती है। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए कहा कि जब लोग अपने देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।

Mann Ki Baat 12 Years : प्रधानमंत्री ने बिहार के मखाना, कर्नाटक की अरहर दाल और महाराष्ट्र के जनजातीय उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में तैयार होने वाले उत्पाद अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल पर आधारित ये उत्पाद भारतीय अर्थव्यवस्था की विविधता को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने खादी की बढ़ती लोकप्रियता का भी जिक्र किया और लोगों से स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की। प्रधानमंत्री के संदेश का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाना, कारीगरों को प्रोत्साहित करना और भारतीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूत करना रहा।

Mann Ki Baat 12 Years : उत्तराखंड में हेवल नदी को नया जीवन देने के प्रयासों की सराहना

‘मन की बात’ के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी के पुनर्जीवन के लिए ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस पहल को जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, एक समय हेवल नदी का जलस्तर लगातार गिर रहा था। इसके साथ ही क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी संकट गहराने लगा था। पानी की उपलब्धता कम होने से नदी और उसके आसपास के पारिस्थितिक तंत्र को बचाने की आवश्यकता महसूस की गई। इस चुनौती से निपटने के लिए ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर नदी के संरक्षण की दिशा में काम शुरू किया। अभियान के अंतर्गत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर पौधरोपण जैसे उपाय अपनाए गए।

Mann Ki Baat 12 Years : इन सामूहिक प्रयासों से नदी के पुनर्जीवन में मदद मिली और आसपास के कई प्राकृतिक जल स्रोतों को भी नया जीवन देने में सफलता मिली। यह पहल दिखाती है कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने इस उदाहरण के माध्यम से संदेश दिया कि यदि समाज किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होकर काम करे, तो कठिन चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है। जल संरक्षण के ऐसे प्रयास दूसरे क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।

Mann Ki Baat 12 Years : पंजाब में पारंपरिक खेती और हस्तकला को बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब में पारंपरिक खेती और हस्तकला को संरक्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी चर्चा की। उन्होंने मालवा क्षेत्र में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने वाली पहल का उल्लेख किया। जैविक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य खेती के टिकाऊ तरीकों को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े स्थानीय अनुभवों एवं परंपराओं को आगे बढ़ाना है। ऐसे प्रयास किसानों को पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नई संभावनाएं भी पैदा कर सकते हैं।

Mann Ki Baat 12 Years : प्रधानमंत्री ने ‘नव-त्रिंजन’ पहल का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से पारंपरिक बुनाई के कौशल को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस तरह की पहलें स्थानीय हस्तकला को जीवित रखने और पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ी तक हस्तांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक कृषि पद्धतियां और स्थानीय समुदायों का जीवन भी शामिल है। इन परंपराओं को संरक्षित करना देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

Mann Ki Baat 12 Years : आम नागरिकों के प्रयासों को देश के सामने लाने का माध्यम बना ‘मन की बात’

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके सामान्य नागरिकों के असाधारण प्रयासों में निहित है। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपने स्तर पर समाज और पर्यावरण के लिए उल्लेखनीय काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों से न केवल स्थानीय समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि दूसरों को भी प्रेरणा मिलती है। ‘मन की बात’ के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश जनभागीदारी, स्थानीय प्रतिभाओं के सम्मान और सामूहिक जिम्मेदारी पर केंद्रित रहा। दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले स्वच्छता और स्वदेशी अपनाने की अपील के जरिए उन्होंने नागरिकों को दैनिक जीवन में छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि देश की प्रगति केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, स्थानीय उत्पादों के प्रति समर्थन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से भी सुनिश्चित होती है।

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