History of Buddhism in Kashmir : काशी विद्यापीठ में कश्मीर में बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक यात्रा पर व्याख्यान

History of Buddhism in Kashmir : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में कश्मीर में बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक यात्रा पर विशेष व्याख्यान आयोजित हुआ। प्रो. मुहम्मद नजरूल बरी ने बौद्ध धर्म के उद्भव, विकास, पतन और आर्थिक कारकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

History of Buddhism in Kashmir : काशी विद्यापीठ में कश्मीर में बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक यात्रा पर विशेष व्याख्यान, आर्थिक कारणों से हुआ उत्कर्ष

History of Buddhism in Kashmir : पुरातात्विक स्रोतों और कालक्रम को इतिहास का आधार बताया, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. मुहम्मद नजरूल बरी ने विद्यार्थियों को शोध पद्धति की बारीकियों से कराया परिचित

History of Buddhism in Kashmir : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के इतिहास विभाग की ओर से गुरुवार को ‘उद्भव से पतन तक: कश्मीर में बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक यात्रा’ विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. मुहम्मद नजरूल बरी ने कश्मीर में बौद्ध धर्म की स्थापना, विकास, उत्कर्ष और पतन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को इतिहास के अध्ययन में पुरातात्विक स्रोतों, कालक्रम और वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति के महत्व से अवगत कराया।

History of Buddhism in Kashmir : प्रो. मुहम्मद नजरूल बरी ने कहा कि पुरातात्विक स्रोत इतिहास के अध्ययन का प्रारंभिक और महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐतिहासिक घटनाओं को सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए कालक्रम की स्पष्टता आवश्यक है। कालक्रम इतिहास की आधार-पीठिका है, जिसके माध्यम से विभिन्न घटनाओं, सामाजिक परिवर्तनों और धार्मिक परंपराओं के विकास को क्रमबद्ध तरीके से समझा जा सकता है। उन्होंने अनुसंधान पद्धति की विशिष्टताओं और उसकी उपयोगिता पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को ऐतिहासिक तथ्यों के विश्लेषण के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

History of Buddhism in Kashmir : कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियों और प्राचीन इतिहास पर चर्चा

व्याख्यान के दौरान मुख्य वक्ता ने कश्मीर की प्राचीनतम ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके भौगोलिक परिवेश की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस क्षेत्र के इतिहास को समझने के लिए साहित्यिक स्रोतों के साथ-साथ वैज्ञानिक तथ्यों के महत्व को रेखांकित किया। उनके व्याख्यान में कश्मीर में बौद्ध धर्म के आगमन, उसकी स्थापना, विभिन्न चरणों में हुए विकास और बाद में उसके पतन से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं को शामिल किया गया। प्रो. बरी ने बताया कि किसी भी धर्म या सांस्कृतिक परंपरा के विकास को समझने के लिए केवल धार्मिक और वैचारिक पक्षों का अध्ययन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पीछे काम करने वाले आर्थिक और सामाजिक कारकों का विश्लेषण भी जरूरी है।

History of Buddhism in Kashmir : बौद्ध धर्म के उत्कर्ष में आर्थिक कारकों की अहम भूमिका

मुख्य वक्ता ने कश्मीर में बौद्ध धर्म के उत्कर्ष की चर्चा करते हुए आर्थिक कारणों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस विषय को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से समझाते हुए विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि धार्मिक परंपराओं के उत्थान और पतन के अध्ययन में आर्थिक परिस्थितियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। व्याख्यान का उद्देश्य विद्यार्थियों को कश्मीर के इतिहास और वहां बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक यात्रा से परिचित कराने के साथ-साथ इतिहास लेखन एवं शोध के प्रति उनकी समझ विकसित करना रहा। कार्यक्रम में प्रस्तुत ऐतिहासिक तथ्यों और शोध पद्धति संबंधी चर्चा से विद्यार्थियों को विषय के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर मिला।

History of Buddhism in Kashmir : शिक्षकों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम का संयोजन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद शंकर चौधरी ने किया। संचालन डॉ. अंजना वर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रविन्द्र कुमार गौतम ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. रमेश प्रकाश चतुर्वेदी, डॉ. बिरेंद्र प्रताप, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. शैलेश कुमार, डॉ. गोपाल यादव, डॉ. प्रिया श्रीवास्तव, डॉ. अंजु सिंह, डॉ. संदीप कुमार सिंह, डॉ. सारिका गौतम और डॉ. प्रियंका सिंह सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

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