Ramnagar Ramleela : रामनगर की रामलीला का दूसरा दिन: दशरथ के घर गूंजी किलकारी, जन्में श्रीराम और तीनों भाई

Ramnagar Ramleela : रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के दूसरे दिन श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म का प्रसंग मंचित हुआ। बारिश के बीच राम जन्म पर अयोध्या में बधाई गीत और उत्सव का माहौल रहा।

Ramnagar Ramleela : रामनगर की रामलीला का दूसरा दिन- दशरथ के घर गूंजी किलकारी, चारों भाइयों के जन्म से अयोध्या में छाई खुशियां

Ramnagar Ramleela : वाराणसी। अनंत चतुर्दशी के दिन रावण जन्म और प्रभु श्रीराम के अवतार की भविष्यवाणी के साथ शुरू हुई रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के दूसरे दिन शनिवार को भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों के जन्म का प्रसंग भावपूर्ण ढंग से मंचित किया गया। बारिश के बीच भी रामलीला का मंचन जारी रहा। खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था बनी रही। श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म के साथ अयोध्या नगरी में उत्सव का माहौल दिखाई दिया।

Ramnagar Ramleela : पुत्र प्राप्ति की चिंता में व्याकुल हुए राजा दशरथ

दूसरे दिन की लीला में अयोध्या के राजा दशरथ संतान न होने की चिंता में व्याकुल होकर गुरु वशिष्ठ के पास पहुंचते हैं। राजा दशरथ अपनी व्यथा बताते हुए कहते हैं कि उनकी आयु का चौथा पड़ाव आ गया है, लेकिन अभी तक उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई। इससे उनका मन बेहद दुखी है।

गुरु वशिष्ठ राजा दशरथ को सांत्वना देते हुए पूर्वजन्म का प्रसंग बताते हैं। वे कहते हैं कि पूर्व जन्म में दशरथ का नाम मनु और कौशल्या का नाम सतरूपा था। दोनों ने भगवान को पुत्र रूप में पाने की कामना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर परमात्मा ने उनके घर अपने अंशों सहित अवतार लेने का वरदान दिया था। गुरु वशिष्ठ उन्हें धैर्य रखने की सलाह देते हैं और चार पुत्रों की प्राप्ति का आश्वासन देते हैं।

Ramnagar Ramleela : पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद हुआ श्रीराम का अवतार

गुरु वशिष्ठ की सलाह पर राजा दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ कराते हैं। यज्ञ के दौरान अग्निदेव प्रकट होते हैं और राजा दशरथ को दिव्य हव्य प्रदान करते हैं। वे उसे तीनों रानियों में बांटने के लिए कहते हैं। राजा दशरथ अग्निदेव के निर्देश के अनुसार हव्य को रानियों में वितरित करते हैं। इसके बाद लीला स्थल पर चतुर्भुज भगवान की मनोहारी झांकी प्रस्तुत की जाती है। देवगण और माता कौशल्या भगवान की स्तुति करते हैं। भगवान श्रीराम कौशल्या से कहते हैं कि उन्होंने उन्हें पुत्र रूप में पाने की इच्छा की थी और उसी वरदान को सत्य करने के लिए वे उनके घर प्रकट हुए हैं।

Ramnagar Ramleela : बाल रूप में आए प्रभु श्रीराम, गूंजी किलकारियां

माता कौशल्या भगवान श्रीराम से चतुर्भुज रूप छोड़कर बाल रूप धारण करने का आग्रह करती हैं। इसके बाद श्रीराम बाल रूप धारण कर रोने लगते हैं। प्रभु के बाल रूप में आते ही अयोध्या में खुशियों की लहर दौड़ जाती है।

रामलीला स्थल पर बैंड-बाजे बजने लगते हैं और बधाई गीतों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। राजा दशरथ ब्राह्मणों को दान देते हैं। इसके साथ ही अयोध्या में उत्सव और आनंद का दृश्य जीवंत हो उठता है।

Ramnagar Ramleela : श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का नामकरण

लीला के अगले प्रसंग में गुरु वशिष्ठ चारों राजकुमारों का नामकरण करते हैं। उन्हें क्रमशः श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न नाम दिए जाते हैं। चारों भाइयों के यज्ञोपवीत संस्कार का प्रसंग भी मंचित किया जाता है। इसके बाद राजकुमारों के गुरुकुल जाकर शिक्षा ग्रहण करने और शिक्षा पूर्ण करने का प्रसंग दिखाया जाता है।

Ramnagar Ramleela : हिरण के शिकार का प्रसंग भी हुआ मंचित

रामलीला के दूसरे दिन श्रीराम के बाल्यकाल से जुड़े प्रसंगों को भी मंचित किया गया। इसमें श्रीराम द्वारा हिरण का शिकार करने और उसके बाद राजा दशरथ को यह बताने का दृश्य प्रस्तुत किया गया कि उन्होंने हिरण का शिकार किया है। इसके बाद माता कौशल्या चारों भाइयों की आरती उतारती हैं। इसी प्रसंग के साथ रामनगर की रामलीला के दूसरे दिन की लीला को विश्राम दिया गया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु लीला के साक्षी बने और राम जन्म के प्रसंग में शामिल होकर भक्ति और परंपरा से जुड़े रहे।

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