Varanasi Tourism : विश्व पर्यटन दिवस पर वाराणसी में पर्यटन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। विशेषज्ञों ने आयुर्वेद, हेल्थ टूरिज्म, AI, संगीत परंपरा और विरासत संरक्षण पर विचार रखे।

Varanasi Tourism : विश्व पर्यटन दिवस पर वाराणसी में पर्यटन जागरूकता कार्यक्रम, आयुर्वेद से AI तक विशेषज्ञों ने रखे विचार
Varanasi Tourism : वाराणसी: विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर शनिवार को अंधरापुल स्थित होटल रिजेंसी में पर्यटन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंटैक वाराणसी, टूरिस्ट गाइड्स एसोसिएशन वाराणसी और टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन के बदलते स्वरूप, स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद पर्यटन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), काशी की सांस्कृतिक एवं संगीत परंपरा, धार्मिक पर्यटन और विरासत संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
Varanasi Tourism : कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों, गाइडों, विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों के बीच पर्यटन की नई संभावनाओं को लेकर संवाद स्थापित करना और काशी की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
Varanasi Tourism : आयुर्वेद और स्वास्थ्य पर्यटन की संभावनाओं पर चर्चा
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नीरज खन्ना ने आयुर्वेद, स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में प्राचीन भारतीय ज्ञान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने पर्यटन के क्षेत्र में ‘टूरिज्म इंटेलिजेंस’ की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी कार्य को श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाना चाहिए। कार्य में परोपकार की भावना भी महत्वपूर्ण है। डॉ. खन्ना ने कहा कि व्यक्ति की आंतरिक सोच और चेतना का प्रभाव उसके कार्यों पर पड़ता है। उन्होंने आयुर्वेद को पर्यटन से जोड़ते हुए हेल्थ और वेलनेस टूरिज्म की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि पर्यटन के दौरान स्वस्थ भोजन और बेहतर स्वास्थ्य का विशेष महत्व है। स्वस्थ व्यक्ति ही किसी पर्यटन स्थल का पूरी तरह आनंद ले सकता है। ऐसे में पर्यटन स्थलों पर पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

Varanasi Tourism : AI के दौर में तकनीक के साथ मानवीय संवेदना जरूरी
बीएचयू साउथ कैंपस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौस्तव चटर्जी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में पर्यटन मार्गदर्शन, विरासत संरक्षण और तकनीक के संतुलित उपयोग पर अपने विचार रखे।उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल मनुष्य की सुविधा के लिए होना चाहिए, न कि मनुष्य तकनीक पर पूरी तरह निर्भर हो जाए। उनके अनुसार AI हमारे उपलब्ध डेटा के आधार पर सूचनाएं तैयार करके उपलब्ध कराता है। इसलिए इसका उपयोग उपयोगी हो सकता है, लेकिन उस पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। डॉ. चटर्जी ने कहा कि तकनीक कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, मानवता और मानवीय संवेदनाओं का स्थान समाप्त नहीं हो सकता। पर्यटन क्षेत्र में AI का इस्तेमाल पर्यटकों को किसी स्थान की जानकारी उपलब्ध कराने में किया जा सकता है, लेकिन इससे पर्यटन गाइड की भूमिका खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि AI किसी स्थान से जुड़ी सामान्य जानकारी दे सकता है, लेकिन स्थानीय इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और वहां के मानवीय अनुभव को जिस तरह एक स्थानीय गाइड समझा सकता है, वह पूरी तरह तकनीक के माध्यम से संभव नहीं है।
Varanasi Tourism : काशी की संगीत परंपरा और चार घरानों पर विमर्श
युवा संगीतकार अनूप मिश्रा ने काशी की समृद्ध संगीत परंपरा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने काशी की उत्पत्ति, सांस्कृतिक विरासत और यहां के संगीत के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संगीत के बिना जीवन अधूरा है। काशी की पहचान केवल उसकी आध्यात्मिक परंपरा से ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संगीत विरासत से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने बनारस के प्रमुख संगीत घरानों की परंपरा और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वाराणसी टूरिज्म गिल्ड के सुभाष कपूर ने प्रतिभागियों और क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
Varanasi Tourism : दक्षिण भारतीय परंपराओं और ‘देवी त्रिकोण’ पर चर्चा
विशिष्ट वक्ता पीएस वेंकटरमन ने ‘देवी त्रिकोण : दक्षिण भारतीय परंपरा’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने दक्षिण भारत के प्रमुख शक्तिपीठों और देवी मंदिरों से जुड़ी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कांचीपुरम, कामाख्या मंदिर, मदुरै के मीनाक्षी देवी मंदिर, मीनाक्षी-सुंदरेश्वर मंदिर और काशी के विशालाक्षी मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों की उत्पत्ति एवं धार्मिक महत्ता के बारे में जानकारी साझा की। वेंकटरमन ने गौरी दर्शन के धार्मिक महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने काशी स्थित विशालाक्षी मंदिर का उल्लेख करते हुए उसके धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। उनके वक्तव्य में दक्षिण भारतीय धार्मिक परंपराओं और काशी की आध्यात्मिक विरासत के बीच संबंधों पर भी चर्चा हुई।
Varanasi Tourism : डिजिटल नवाचार के साथ बदल रही काशी की तस्वीर

राजघाट स्थित वसंता कॉलेज के प्रोफेसर संजीव कुमार ने ‘काशी का नया स्वरूप, आस्था और डिजिटल नवाचार’ विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि काशी की पारंपरिक पहचान और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने पर्यटन में डिजिटल तकनीक और AI के बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा करते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं और जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। हालांकि, इसके साथ शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत के संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
Varanasi Tourism : पर्यटन क्षेत्र में बेहतर समन्वय पर जोर
कार्यक्रम में हिमांशु श्रीवास्तव ने भी पर्यटन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच बेहतर समन्वय और जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें प्रतिभागियों से काशी, पर्यटन, संस्कृति और विरासत से जुड़े सवाल पूछे गए। प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
Varanasi Tourism : स्वागत से शुरू हुआ कार्यक्रम, अतिथियों ने किया संबोधन
कार्यक्रम की शुरुआत इंटैक वाराणसी के कन्वेनर अशोक कपूर के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में नीलेश सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि जैनेन्द्र राय ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर कर्नल संदीप शर्मा, अमित गुप्ता, राहुल मेहता, अनिल केशरी, अखिलेश कुमार सहित पर्यटन, विरासत, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।
Varanasi Tourism : कार्यक्रम में हुई चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि काशी जैसे ऐतिहासिक शहर में पर्यटन को आधुनिक तकनीक और नई सुविधाओं से जोड़ने के साथ-साथ इसकी सदियों पुरानी सांस्कृतिक, धार्मिक और संगीत परंपराओं का संरक्षण भी जरूरी है। आयुर्वेद, वेलनेस टूरिज्म और AI जैसी नई संभावनाएं वाराणसी के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा दे सकती हैं, वहीं स्थानीय गाइड, कलाकार, इतिहास और मानवीय अनुभव इसकी विशिष्ट पहचान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।