CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIR से जुड़े फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है। जानें 14 आपत्तियों, Form 6, 13 करोड़ नाम हटाने के आरोप और चुनाव आयोग के जवाब से जुड़ा पूरा विवाद।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR के फैसलों पर उठे सवाल, जानें क्या है पूरा विवाद
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग से जुड़े कुछ फैसले दूसरे दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिका में कथित तौर पर ऐसे फैसलों को रद्द करने, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार के साथ वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की आईटी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की गई?
याचिका में मांग की गई है कि ऐसे सभी फैसले, दिशा-निर्देश, आदेश और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को रद्द किया जाए, जो याचिकाकर्ता के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा पूर्ण आयोग की सहमति के बिना शुरू, मंजूर या लागू किए गए। याचिका में Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की संबंधित व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोग के फैसलों में निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। इसके अलावा Representation of the People Act, 1950 की धारा 32 के तहत कथित कर्तव्य उल्लंघन को लेकर कार्रवाई और अभियोजन की मांग भी की गई है।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की जांच की मांग
याचिका का एक प्रमुख हिस्सा SIR के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और इसकी स्वतंत्र जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग या Special Investigation Team (SIT) गठित की जानी चाहिए।
इसके साथ ही याचिका में चुनाव आयोग के ECINet और ERONet जैसे डिजिटल डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा SIR से जुड़े रिकॉर्ड, सर्वर लॉग, डेटाबेस और संबंधित संचार को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
हालांकि, 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आंकड़ा याचिका में लगाया गया आरोप है, सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित तथ्य नहीं। इसलिए इस आंकड़े को वर्तमान में याचिकाकर्ता के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : Form 6 में बदलाव को लेकर भी विवाद
विवाद का एक अहम मुद्दा नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला Form 6 भी है। याचिका में इस फॉर्म के मूल स्वरूप को बहाल करने की मांग की गई है।
इससे पहले द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया था कि Form 6 में SIR से संबंधित एक घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें नए मतदाता से यह जानकारी मांगी गई थी कि उसका नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम उस सूची में था।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी और सवाल उठाया था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों का क्या मामला है?
पूरे विवाद को हवा उस रिपोर्ट से मिली जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्टों के मुताबिक इन मुद्दों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, मतदाता डेटा तक पहुंच, Form 6 में बदलाव और चुनावी सॉफ्टवेयर एवं आईटी सिस्टम से संबंधित प्रक्रियाएं शामिल थीं। कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियों में यह सवाल भी उठाया गया कि संबंधित फैसले या आदेश सभी चुनाव आयुक्तों की जानकारी अथवा सहमति के बिना जारी किए गए थे।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने आरोपों के उस स्वरूप को खारिज किया है जिसमें यह कहा गया कि CEC ने अकेले फैसले लिए। चुनाव आयोग के मुताबिक तीन सदस्यीय आयोग में किसी मुद्दे पर अलग-अलग राय या सवाल उठना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने कहा कि SIR समेत उसके सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवाल और सुझाव मुख्य रूप से मसौदा स्तर की प्रक्रियाओं से जुड़े थे और उन्हें निर्णय प्रक्रिया के दौरान विचार में लिया गया।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : इस तरह मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं—एक ओर याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुछ फैसले पूर्ण आयोग की सहमति के बिना लिए गए, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नामों के सत्यापन, नए मतदाताओं के पंजीकरण और अपात्र या स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा जैसे मुद्दे सामने आते हैं। इसी वजह से मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया राजनीतिक और कानूनी रूप से संवेदनशील विषय बन गई है। हाल के विवाद में खास तौर पर मतदाता डेटा के प्रबंधन, सॉफ्टवेयर और Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठे हैं।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : कांग्रेस और विपक्ष का विरोध
इस विवाद के बीच कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में चुनाव आयोग के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा। पार्टी की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग की जा रही है। 25 सितंबर को चंडीगढ़ में यूथ कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। विपक्षी दल SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बताते हुए आंतरिक मतभेद से संबंधित रिपोर्टों की व्याख्या पर आपत्ति जताई है।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : महाराष्ट्र में भी अदालत पहुंचा मामला
सुप्रीम कोर्ट की याचिका के अलावा SIR को लेकर महाराष्ट्र में भी मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच चुका है। एक याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 प्रशासनिक कदमों को चुनौती देने और SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई है।
इससे संकेत मिलता है कि SIR को लेकर विवाद केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग अदालतों में इसकी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को कानूनी चुनौती भी दी जा रही है।
CEC Gyanesh Kumar Supreme Court : अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कई व्यापक मांगें की गई हैं। इनमें कथित तौर पर पूर्ण आयोग की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को रद्द करना, Form 6 के मूल स्वरूप को बहाल करना, SIR से जुड़े डेटा का फोरेंसिक ऑडिट और कथित मतदाता नाम हटाने की स्वतंत्र जांच शामिल है।
फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने भी संबंधित फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। इसलिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सुप्रीम कोर्ट याचिका पर क्या आदेश देता है और किन मुद्दों पर न्यायिक जांच या सुनवाई आगे बढ़ती है।