CEC Gyanesh Kumar Removal: मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए कितने सांसद चाहिए? जानें पूरी प्रक्रिया

CEC Gyanesh Kumar Removal: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष फिर प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। जानें CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया, 100 लोकसभा और 50 राज्यसभा सांसदों की भूमिका, जांच समिति और विशेष बहुमत से जुड़े सभी नियम।

CEC Gyanesh Kumar Removal: CEC Gyanesh Kumar पर फिर महाभियोग की तैयारी, जानें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए कितने सांसदों की जरूरत और क्या है पूरी प्रक्रिया?

CEC Gyanesh Kumar Removal: नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों और दो चुनाव आयुक्तों की ओर से आयोग के कुछ फैसलों व प्रक्रियाओं पर दर्ज कराई गई लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने एक बार फिर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग तेज कर दी है।

CEC Gyanesh Kumar Removal: 24 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि संयुक्त विपक्ष की ओर से प्रस्ताव का मसौदा कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है और जल्द ही दोनों सदनों में नोटिस दिए जा सकते हैं।

CEC Gyanesh Kumar Removal: यह घटनाक्रम द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने, SIR से संबंधित प्रक्रियाओं और चुनावी डेटा-सॉफ्टवेयर के प्रबंधन जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आपत्तियों या आंतरिक मतभेदों की रिपोर्ट को अपने आप किसी कदाचार का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

CEC Gyanesh Kumar Removal: क्या है पूरा विवाद?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर आयोग की कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, SIR से जुड़ी प्रक्रियाओं और मतदाता डेटा वाले सॉफ्टवेयर तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे। दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर कुछ प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए और मतदाता डेटा के केंद्रीकृत प्रबंधन पर भी चिंता जताई।

इसी रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी। 24 सितंबर को कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि संयुक्त विपक्ष संसद के दोनों सदनों में हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।

CEC Gyanesh Kumar Removal: CEC की नियुक्ति कैसे होती है?

भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 324 में किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। 2023 के कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल अधिकतम छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, निर्धारित है।

CEC Gyanesh Kumar Removal: CEC को हटाना इतना मुश्किल क्यों है?

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की व्यवस्था आम चुनाव आयुक्तों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरीके और आधार पर सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है। यानी केवल राजनीतिक आरोप, किसी निर्णय से असहमति या प्रशासनिक विवाद अपने आप CEC को हटाने का संवैधानिक आधार नहीं बनते। हटाने की कार्रवाई सिद्ध कदाचार (proved misbehaviour) या अक्षमता (incapacity) के आधार पर होती है। वहीं, अन्य चुनाव आयुक्त या क्षेत्रीय चुनाव आयुक्त को CEC की सिफारिश के बिना हटाया नहीं जा सकता।

CEC Gyanesh Kumar Removal: महाभियोग प्रस्ताव के लिए कितने सांसद चाहिए?

CEC को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए संसद में एक निश्चित संख्या में सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

लोकसभा में

कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।

राज्यसभा में

कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।

यह व्यवस्था Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 में दी गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है और CEC पर लागू संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि 100 या 50 सांसदों के हस्ताक्षर केवल प्रस्ताव का नोटिस देने की न्यूनतम सीमा हैं। इससे CEC स्वतः पद से नहीं हटते।

CEC Gyanesh Kumar Removal: नोटिस देने के बाद क्या होता है?

प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है।

पहला चरण: सांसद हटाने के प्रस्ताव का नोटिस देते हैं।

लोकसभा में नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को दिया जाता है।

राज्यसभा में नोटिस राज्यसभा के सभापति को दिया जाता है। इसके बाद संबंधित पीठासीन अधिकारी के पास प्रस्ताव को स्वीकार करने या अस्वीकार करने का अधिकार होता है।

दूसरा चरण: यदि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाती है।

इस समिति में सामान्यतः:

सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश,

किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश,

एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ यानी Distinguished Jurist

शामिल होते हैं।

तीसरा चरण: जांच समिति आरोपों की जांच करती है। संबंधित व्यक्ति को आरोपों का जवाब देने और अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाता है। समिति अपनी रिपोर्ट में प्रत्येक आरोप पर निष्कर्ष देती है।

CEC Gyanesh Kumar Removal:अगर जांच समिति आरोप सही पाती है तो?

यदि जांच में कदाचार या अक्षमता साबित नहीं होती, तो हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती।

यदि आरोप साबित होते हैं, तो संसद में हटाने का प्रस्ताव आगे बढ़ता है। इसके बाद दोनों सदनों में प्रस्ताव पर मतदान होता है।

CEC Gyanesh Kumar Removal: संसद में कितने बहुमत की जरूरत होगी?

CEC को हटाने के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं है। दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत होती है।

इसके लिए:

सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत, और

उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मत

दोनों शर्तें पूरी करनी होती हैं।

दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति के समक्ष हटाने का संबोधन भेजा जाता है और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत CEC को पद से हटाया जा सकता है।

CEC Gyanesh Kumar Removal: मार्च 2026 में भी आया था प्रस्ताव

ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष इससे पहले भी मार्च 2026 में संसद में प्रस्ताव का नोटिस दे चुका है।

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 12 मार्च 2026 को लोकसभा वाले नोटिस पर 130 सांसदों और राज्यसभा वाले नोटिस पर 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। दोनों प्रस्तावों में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और CEC के कथित आचरण से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया था।

हालांकि, अप्रैल 2026 में लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने दोनों नोटिस स्वीकार नहीं किए थे।

CEC Gyanesh Kumar Removal: अब सितंबर में फिर क्यों बढ़ा मामला?

सितंबर में चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर दर्ज की गई 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मुद्दा दोबारा चर्चा में आया है। विपक्षी दलों ने इन रिपोर्टों को आधार बनाकर CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है। इसलिए फिलहाल दो अलग-अलग बातें स्पष्ट रूप से अलग रखना जरूरी है—एक ओर चुनाव आयोग के भीतर दर्ज कथित आपत्तियों की रिपोर्ट है और दूसरी ओर CEC को हटाने के लिए आवश्यक संवैधानिक जांच एवं संसदीय प्रक्रिया।

CEC को हटाने की पूरी प्रक्रिया एक नजर में

100 लोकसभा सांसद / 50 राज्यसभा सांसद → नोटिस → अध्यक्ष/सभापति की स्वीकार्यता → तीन सदस्यीय जांच समिति → आरोपों की जांच → कदाचार/अक्षमता साबित होने पर संसद में प्रस्ताव → दोनों सदनों में विशेष बहुमत → राष्ट्रपति के समक्ष संबोधन → हटाने की प्रक्रिया।

CEC Gyanesh Kumar Removal: इसलिए केवल 100 या 50 सांसदों के हस्ताक्षर जुटा लेना CEC को हटाने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह केवल प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक संसदीय समर्थन की न्यूनतम सीमा है। अंतिम कार्रवाई के लिए जांच और दोनों सदनों में संवैधानिक विशेष बहुमत जरूरी है। भारत में अब तक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस प्रक्रिया के जरिए पद से हटाया नहीं गया है।

CEC Gyanesh Kumar Removal: स्थिति 25 सितंबर 2026 तक: विपक्ष की ओर से नए प्रस्ताव का मसौदा तैयार किए जाने की खबर है। वास्तविक प्रक्रिया तब आगे बढ़ेगी जब औपचारिक नोटिस संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी के समक्ष दिया जाएगा और उस पर निर्णय होगा।

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