Banarasi Saree Price Hike : धागे की बढ़ती कीमतों के कारण वाराणसी में बनारसी साड़ी, सूट फैब्रिक, दुपट्टे और अन्य वस्त्र 10 सितंबर से 10-15% तक महंगे होंगे। जानें कीमत बढ़ने की वजह और यूपी टेक्स-2026 में काशी के वस्त्र उद्योग की तैयारी।
Banarasi Saree Price Hike : वाराणसी। त्योहारी सीजन में बनारसी साड़ी, सूट फैब्रिक और दुपट्टा खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को अब पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। वाराणसी के बुनकर संगठनों, व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों की बैठक में तैयार वस्त्रों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने पर सहमति बनी है। नई दरें 10 सितंबर 2026 से लागू होंगी।
Banarasi Saree Price Hike : कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय में होने जा रही है, जब दशहरा, दीपावली समेत कई प्रमुख त्योहारों को लेकर बाजार में पारंपरिक वस्त्रों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। बुनकरों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में धागे और पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और मौजूदा कीमतों पर कारोबार करना मुश्किल हो रहा है।
Banarasi Saree Price Hike : पांच महीने में धागे की कीमतों में बड़ा इजाफा
वाराणसी वस्त्र बुनकर संघ के उपाध्यक्ष शैलेश सिंह के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक राजनीतिक तनाव का असर सिंथेटिक और पेट्रोकेमिकल आधारित धागों पर पड़ा है। पिछले करीब पांच महीनों में इन कच्चे माल की कीमतों में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि करीब पांच महीने पहले जिस धागे की कीमत 200 रुपये प्रति किलोग्राम थी, वह अब बढ़कर लगभग 260 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इसी तरह करीब 120 रुपये प्रति किलोग्राम वाला दूसरा धागा अब लगभग 175 रुपये प्रति किलोग्राम में मिल रहा है।
Banarasi Saree Price Hike : बुनकरों के मुताबिक धागे की कीमत बढ़ने का सीधा असर साड़ी, सूट फैब्रिक, दुपट्टे और अन्य वस्त्रों की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। इसमें बुनाई, डिजाइन, रंगाई, फिनिशिंग और अन्य प्रक्रियाओं की लागत भी शामिल है। ऐसे में तैयार उत्पादों की कीमत में संशोधन करना कारोबार की मजबूरी बन गया है।
Banarasi Saree Price Hike : कई संगठनों और व्यापारियों ने दी सहमति
कीमतों में बदलाव को लेकर बुनकर उद्योग मंडल, बुनकर बिरादराना तंजीम, हिंदू बुनकर कल्याण समिति, स्थानीय ‘गिरस्ता’ और व्यापारियों की बैठक हुई। बैठक में उत्पादन लागत में लगातार हो रही वृद्धि पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद 10 सितंबर से तैयार वस्त्रों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी लागू करने पर सहमति बनी। इसका असर खासतौर पर बनारसी साड़ी के अलावा सूट फैब्रिक, दुपट्टा, थान और अन्य तैयार वस्त्रों पर पड़ सकता है।
Banarasi Saree Price Hike : त्योहारों में बढ़ेगा ग्राहकों का बजट
दशहरा और दीपावली के दौरान बनारसी साड़ियों और पारंपरिक कपड़ों की मांग आम तौर पर बढ़ जाती है। शादी-ब्याह के सीजन की शुरुआत के साथ भी बनारसी वस्त्रों की बिक्री में तेजी आती है। ऐसे में कीमतों में प्रस्तावित बढ़ोतरी का सीधा असर ग्राहकों के बजट पर पड़ सकता है । व्यापारियों का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले धागे और डिजाइन वाली बनारसी साड़ियों में कीमतों का अंतर अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे सकता है। हालांकि वास्तविक कीमत साड़ी के डिजाइन, जरी, बुनाई, धागे और काम की गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग होगी।
Banarasi Saree Price Hike : यूपी टेक्स-2026 में दिखेगी काशी के वस्त्र उद्योग की ताकत
दूसरी ओर, वाराणसी का वस्त्र उद्योग अपनी पारंपरिक विरासत के साथ आधुनिक उत्पादन क्षमता को देश-दुनिया के सामने पेश करने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 8 और 9 सितंबर को ‘यूपी टेक्स-2026’ का आयोजन किया जा रहा है।
Banarasi Saree Price Hike : इस आयोजन में वाराणसी के करीब 50 कारोबारी हिस्सा ले रहे हैं। प्रदर्शनी में बनारसी साड़ी तैयार करने की प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही रेडीमेड कपड़ों के निर्माण की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की जाएगी। रेडीमेड गारमेंट कारोबारी राजेश जायसवाल के मुताबिक, ऐसे आयोजन स्थानीय कारोबारियों के लिए अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इससे नए खरीदारों, सप्लायर्स और कारोबारी साझेदारों से सीधे संपर्क स्थापित करने का अवसर मिलता है।
Banarasi Saree Price Hike : लाइव डेमो के जरिए दुनिया तक पहुंचेगी बनारसी बुनाई
लाइव डेमो देने वाले बुनकर गौरव मौर्या ने कहा कि बनारसी साड़ी काशी की सदियों पुरानी कला, संस्कृति और पहचान से जुड़ी है। ऐसे आयोजनों में साड़ी बनाने की पूरी प्रक्रिया को सामने लाने से लोगों को बुनकरों की मेहनत और पारंपरिक तकनीक को करीब से समझने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक मंचों के माध्यम से बनारसी बुनाई की परंपरा को नए बाजारों और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
Banarasi Saree Price Hike : रेडीमेड गारमेंट सेक्टर में भी संभावनाएं
उद्योग विभाग की उपायुक्त उद्योग (प्रवर्तन), हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग कुसुम के अनुसार, वाराणसी में पारंपरिक वस्त्र उद्योग के साथ-साथ रेडीमेड गारमेंट क्षेत्र में भी व्यापक संभावनाएं हैं। ऐसे व्यापारिक और प्रदर्शनी मंच कारोबारियों को नए बाजारों और खरीदारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Banarasi Saree Price Hike : वाराणसी के वस्त्र उद्योग के लिए यह समय एक ओर बढ़ती उत्पादन लागत की चुनौती लेकर आया है, तो दूसरी ओर नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर भी दे रहा है। आने वाले त्योहारों में जहां ग्राहकों को बनारसी वस्त्रों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, वहीं कारोबारियों को उम्मीद है कि बढ़ती मांग और नए बाजारों से उद्योग को मजबूती मिलेगी।