Hindi Journalism History and Current Challenges : काशी विद्यापीठ में हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास और वर्तमान चुनौतियों पर विशेष व्याख्यान

Hindi Journalism History and Current Challenges : काशी विद्यापीठ में हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास एवं वर्तमान चुनौतियों पर विशेष व्याख्यान हुआ। डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने ‘उदंत मार्तण्ड’ से आधुनिक पत्रकारिता तक की यात्रा और पत्रकारिता मूल्यों पर विचार रखे।

Hindi Journalism History and Current Challenges : काशी विद्यापीठ में हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास और वर्तमान चुनौतियों पर विशेष व्याख्यान

200 वर्षों की पत्रकारिता यात्रा, सामाजिक सरोकार और बदलते दौर की चुनौतियों पर डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने रखे विचार

Hindi Journalism History and Current Challenges : वाराणसी, 20 अगस्त। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में गुरुवार को ‘हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास एवं वर्तमान चुनौतियां’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश के मुख्य वक्ता डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने हिन्दी पत्रकारिता की करीब दो शताब्दियों की विकास यात्रा, उसके सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान तथा वर्तमान समय में सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।

Hindi Journalism History and Current Challenges : ‘उदंत मार्तण्ड’ से शुरू हुई हिन्दी पत्रकारिता की यात्रा

मुख्य वक्ता डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा ‘उदंत मार्तण्ड’ के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत हुई। उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता के विकास के विभिन्न चरणों को रेखांकित करते हुए भारतेंदु युग, द्विवेदी युग और गांधी युग की पत्रकारिता की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास केवल समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के प्रकाशन का इतिहास नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज में जागरूकता, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय चेतना के विकास की भी महत्वपूर्ण यात्रा है। इस दौरान उन्होंने ‘उदंत मार्तण्ड’, ‘बनारस अखबार’, ‘बाला बोधिनी’, ‘प्रताप’ और ‘कर्मवीर’ जैसे प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं के योगदान का उल्लेख किया।

Hindi Journalism History and Current Challenges : सामाजिक सुधार और राष्ट्रवादी चेतना में महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ. प्रसाद ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता ने साहित्यिक अभिव्यक्ति को मंच प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने, राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने और राष्ट्रवादी चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ब्रिटिश शासन के दौर में पत्रकारिता ने जनमत निर्माण और स्वतंत्रता आंदोलन के विचारों को आम जनता तक पहुंचाने में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि “पत्रकारिता जल्दी में लिखा गया साहित्य है”, लेकिन इसका प्रभाव व्यापक और लंबे समय तक रहने वाला होता है। इसलिए पत्रकारों के लिए भाषा, तथ्य, दृष्टिकोण और नैतिकता का विशेष महत्व है।

Hindi Journalism History and Current Challenges : पत्रकारिता के मूल्यों से प्रेरणा लेने का आह्वान

मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भारतीय पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास और उसके मूल्यों को समझें तथा महान पत्रकारों एवं विचारकों के कार्यों से प्रेरणा लें। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र, महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय और जुगल किशोर शुक्ल के पत्रकारिता मूल्यों एवं नैतिक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से तथ्यपरक, जिम्मेदार और जनसरोकार वाली पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। उन्होंने बदलते मीडिया परिदृश्य में पत्रकारिता के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा की और कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ पत्रकारिता के स्वरूप में तेजी से परिवर्तन आया है। ऐसे समय में पत्रकारों के लिए विश्वसनीयता, तथ्य-जांच और पत्रकारिता के मूल मूल्यों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

Hindi Journalism History and Current Challenges : प्रारंभिक दौर से वर्तमान समय तक की चुनौतियों पर चर्चा

कार्यक्रम में डॉ. गिरीश दुबे ने भी भारतीय पत्रकारिता के प्रारंभिक दौर से लेकर वर्तमान समय तक की चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और वर्तमान मीडिया वातावरण में पत्रकारों की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया।

Hindi Journalism History and Current Challenges : कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने दिया। संचालन डॉ. मनोहर लाल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजय वर्मा ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, साजिया, कोमल, मुदित, पीयूष, कशिश, सानिया, समर, आशीष, अनमोल, राघव, दिलकशा, अमित सहित पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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