Diesel Price Freight Hike : देशभर में डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रांसपोर्ट संगठनों ने माल भाड़ा बढ़ाने का ऐलान किया है। अब हर ₹1 डीजल महंगा होने पर फ्रेट चार्ज 0.65% बढ़ेगा, जिससे सब्जी, अनाज, दवाइयों समेत रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।

Diesel Price Freight Hike : ट्रांसपोर्ट सेक्टर का बड़ा ऐलान, हर ₹1 डीजल बढ़ने पर बढ़ेगा माल भाड़ा
Diesel Price Freight Hike : मुंबई , पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब देश की सप्लाई चेन और आम आदमी की जेब पर पड़ता दिखाई देने लगा है। देशभर के ट्रांसपोर्टरों के संगठन All India Transporters Welfare Association (AITWA) ने माल ढुलाई के किराए में बढ़ोतरी का बड़ा फैसला लिया है। संगठन के इस निर्णय के बाद आने वाले दिनों में सब्जियों, अनाज, दवाइयों, FMCG उत्पादों और अन्य रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।
Diesel Price Freight Hike : 20 मई से लागू हुआ नया नियम

AITWA ने 20 मई 2026 से Fuel Adjustment Factor (FAF) लागू कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत 15 मई 2026 की डीजल कीमत को बेस प्राइस माना गया है। इसके बाद यदि डीजल की कीमत में प्रति लीटर ₹1 की बढ़ोतरी होती है तो माल भाड़े में स्वतः 0.65 फीसदी की वृद्धि जोड़ दी जाएगी। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में परिवहन उद्योग की लागत तेजी से बढ़ी है और मौजूदा हालात में बिना भाड़ा बढ़ाए संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है।
Diesel Price Freight Hike : क्यों बढ़ रही है ट्रांसपोर्ट लागत?
ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक सिर्फ डीजल ही नहीं बल्कि कई अन्य खर्चों में भी भारी इजाफा हुआ है।
Diesel Price Freight Hike : डीजल पर सबसे ज्यादा निर्भरता

ट्रांसपोर्ट सेक्टर की कुल परिचालन लागत में लगभग 65 फीसदी हिस्सा सिर्फ डीजल का होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी भी सीधे माल भाड़े पर असर डालती है।
Diesel Price Freight Hike : AdBlue और टायर हुए महंगे
ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि AdBlue (DEF) की कीमतें पिछले दो महीनों में लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। ट्रकों के टायरों की कीमत में करीब 5 फीसदी की वृद्धि हुई है। 1 अप्रैल 2026 से देशभर में टोल टैक्स भी बढ़ाया गया है। इन सभी वजहों से ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लागत लगातार बढ़ रही है।
Diesel Price Freight Hike : वैश्विक तनाव का भी असर
विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अस्थिर स्थिति के कारण कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों पर पड़ा है। वहीं भारतीय रुपये में कमजोरी के कारण तेल आयात और महंगा हो गया है। इसी वजह से घरेलू बाजार में डीजल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।
Diesel Price Freight Hike : ट्रक ड्राइवरों की बढ़ी परेशानी

ट्रक चालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण लंबी दूरी तक माल ढुलाई करना मुश्किल होता जा रहा है। कई इलाकों में डीजल की सीमित उपलब्धता भी परेशानी बढ़ा रही है। ड्राइवरों के अनुसार कुछ पेट्रोल पंपों पर एक बार में 100 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जा रहा। लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों को बार-बार रुकना पड़ रहा है। माल ढुलाई के ऑर्डर भी पहले की तुलना में कम हो रहे हैं।
Diesel Price Freight Hike : आम लोगों पर कैसे पड़ेगा असर?

भारत में ज्यादातर सामानों की ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने का असर सीधे बाजार कीमतों पर दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सब्जियां और फल महंगे हो सकते हैं। अनाज और किराना सामान के दाम बढ़ सकते हैं। दवाइयों और FMCG उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। ई-कॉमर्स डिलीवरी चार्ज भी प्रभावित हो सकते हैं। यदि डीजल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो महंगाई पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
Diesel Price Freight Hike : सप्लाई चेन पर बढ़ेगा दबाव
परिवहन उद्योग को भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। देश की सप्लाई चेन का बड़ा हिस्सा ट्रकों पर निर्भर करता है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट सेक्टर में लागत वृद्धि का असर उद्योग, व्यापार और उपभोक्ताओं तक तेजी से पहुंच सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईंधन कीमतों को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले महीनों में बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।