INTACH Varanasi Heritage Walk: सारनाथ इंटरनेशनल निंगमा इंस्टीट्यूट में बौद्ध विरासत और शिक्षा से रूबरू हुए सदस्य

INTACH Varanasi Heritage Walk: INTACH वाराणसी चैप्टर के 40 सदस्यों ने धरोहर यात्रा के अंतर्गत सारनाथ इंटरनेशनल निंगमा इंस्टीट्यूट का भ्रमण किया। सदस्यों ने मेडिटेशन हॉल, दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियों वाली लाइब्रेरी और बोधि वृक्ष का अवलोकन कर तिब्बती बौद्ध शिक्षा एवं संस्कृति की जानकारी प्राप्त की।

INTACH Varanasi Heritage Walk: वाराणसी। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (INTACH) वाराणसी चैप्टर की ओर से आयोजित धरोहर यात्रा के अंतर्गत रविवार को लगभग 40 सदस्यों एवं उनके परिवारजनों ने सारनाथ स्थित INTACH Varanasi Chapter के तत्वावधान में Sarnath International Nyingma Institute का भ्रमण किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शहर और आसपास स्थित ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहरों से लोगों को परिचित कराना था।

INTACH Varanasi Heritage Walk: INTACH वाराणसी चैप्टर प्रत्येक माह अपने सदस्यों एवं उनके परिवारों के लिए “हेरिटेज वॉक” कार्यक्रम आयोजित करता है, जिसके अंतर्गत विभिन्न धरोहर स्थलों, स्मारकों एवं सांस्कृतिक केंद्रों का भ्रमण कराया जाता है। इस बार की धरोहर यात्रा की रूपरेखा श्री अखिलेश कुमार, अनुराग चंद्र एवं अशोक कपूर ने संयुक्त रूप से तैयार की। उन्होंने उपस्थित सदस्यों को सारनाथ स्थित निंगमा संस्थान के इतिहास, उद्देश्य एवं वैश्विक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

INTACH Varanasi Heritage Walk: कार्यक्रम के दौरान सदस्यों को बताया गया कि सारनाथ इंटरनेशनल निंगमा इंस्टीट्यूट लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में फैला एक महत्वपूर्ण तिब्बती महायान बौद्ध शिक्षण केंद्र है, जहां तीन वर्षीय उच्चस्तरीय पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है। संस्थान की स्थापना वर्ष 2013 में की गई थी। यह संस्थान पूर्व और पश्चिम के बीच ज्ञान, संस्कृति एवं आध्यात्मिकता का सेतु बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया।

INTACH Varanasi Heritage Walk: सदस्यों ने संस्थान परिसर में स्थित मेडिटेशन हॉल, कक्षाओं और “येशे डे लाइब्रेरी” का भ्रमण किया। लाइब्रेरी में तिब्बत सहित विभिन्न स्थानों से संकलित दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियों का विशाल संग्रह सुरक्षित रखा गया है। इन पांडुलिपियों का तिब्बती भाषा से अंग्रेजी में अनुवाद भी किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान सदस्यों ने एक प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपि का अवलोकन भी किया, जिसने सभी को विशेष रूप से आकर्षित किया।

INTACH Varanasi Heritage Walk: संस्थान के प्रबंधक श्री उगेन त्सेरिंग ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए संस्थान की कार्यप्रणाली, शिक्षा व्यवस्था, आध्यात्मिक गतिविधियों तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में अध्ययनरत सभी भिक्षु परिसर में ही निवास करते हैं और तिब्बती बौद्ध धर्म की शिक्षा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जाती है।

INTACH Varanasi Heritage Walk: उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान की स्थापना की प्रेरणा तब मिली जब वर्ष 1994 में निंगमा परंपरा के आचार्य तार्थंग रिनपोछे ने सारनाथ में भूमि खरीदी थी। बाद में उनकी पुत्री त्सेरिंग ने वर्ष 2006 में इसे एक अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य प्रारंभ किया। संस्थान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ के निकट स्थित है और आज यह विश्वभर के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, भिक्षुओं एवं आध्यात्मिक साधकों का केंद्र बन चुका है।

INTACH Varanasi Heritage Walk: संस्थान परिसर में स्थापित पवित्र बोधि वृक्ष भी आकर्षण का केंद्र रहा। यह पौधा श्रीलंका से लाकर लगाया गया था और इसे उसी मूल बोधि वृक्ष की शाखा माना जाता है, जिसके नीचे भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। बोधि वृक्ष के नीचे श्री उगेन त्सेरिंग ने उपस्थित सदस्यों को संस्थान की आध्यात्मिक परंपरा एवं उसकी वैश्विक भूमिका के बारे में जानकारी दी।

INTACH Varanasi Heritage Walk: सदस्यों ने परिसर की स्थापत्य कला और पर्यावरण अनुकूल निर्माण की भी सराहना की। संस्थान के भवनों में भारतीय, तिब्बती और पाश्चात्य वास्तुकला का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। परिसर में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्ष 2010 में संस्थान को ग्रीन बिल्डिंग अवॉर्ड भी प्राप्त हुआ था, जबकि वर्ष 2019 में परिसर में सोलर पैनल लगाए गए, जिससे यह एक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल शिक्षण केंद्र बन सका है।

INTACH Varanasi Heritage Walk: संस्थान का मंदिर भी अपनी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए विशेष रूप से चर्चित है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर 7000 से अधिक स्वर्णिम ल्हांत्सा प्रार्थना अक्षर अंकित हैं, जिन्हें विश्वभर के निंगमा केंद्रों से आए स्वयंसेवकों ने स्थापित किया था। मंदिर के भीतर बनी तिब्बती बौद्ध चित्रकलाएं और भित्तिचित्र ध्यान एवं साधना के लिए अत्यंत शांत वातावरण प्रदान करते हैं।

INTACH Varanasi Heritage Walk: कार्यक्रम के अंत में INTACH वाराणसी चैप्टर के संयोजक अशोक कपूर ने श्री उगेन त्सेरिंग को सम्मानित किया तथा INTACH के कुछ प्रकाशन भेंट किए। उपस्थित सदस्यों ने कहा कि यह धरोहर यात्रा न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इससे बौद्ध दर्शन, तिब्बती संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन शैली को निकट से समझने का अवसर भी प्राप्त हुआ।

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