Kashi Vidyapeeth 106th Foundation Day : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 106वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी के नेतृत्व में भव्य शोभा यात्रा निकाली गई और संस्थापकों के मानवीय मूल्यों व कौशल आधारित शिक्षा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
Kashi Vidyapeeth 106th Foundation Day : काशी विद्यापीठ का 106वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न, कुलपति के नेतृत्व में निकली भव्य शोभा यात्रा

Kashi Vidyapeeth 106th Foundation Day : वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 106वां स्थापना दिवस मंगलवार को पूरे उत्साह, गरिमा और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी के नेतृत्व में भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें विश्वविद्यालय के सभी संकायों, विभागों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही। स्थापना दिवस के शुभारंभ पर कुलपति प्रो. त्यागी ने मानविकी संकाय के समक्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति भारत रत्न डॉ. भगवान दास की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद पंत प्रशासनिक भवन के सामने स्थित गांधी जी की प्रतिमा पर भी श्रद्धांजलि दी गई।

Kashi Vidyapeeth 106th Foundation Day : ऐतिहासिक झांकियों से सजी शोभा यात्रा
दीक्षांत मंडप परिसर से प्रारंभ हुई शोभा यात्रा मानविकी संकाय, परीक्षा भवन, केंद्रीय पुस्तकालय, प्रशासनिक भवन, आजाद चौक, वाणिज्य संकाय एवं आचार्य नरेंद्रदेव छात्रावास होते हुए विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद गेट से क्रीड़ांगन तक पहुंची। शोभा यात्रा में मानविकी, समाज विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षाशास्त्र, कृषि विज्ञान संकाय, विधि संकाय, केंद्रीय पुस्तकालय, पर्यटन अध्ययन संस्थान एवं महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान सहित सभी इकाइयों ने काशी विद्यापीठ के गौरवशाली इतिहास को प्रदर्शित करती झांकियां प्रस्तुत कीं। क्रीड़ांगन में कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी, कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय एवं अन्य अधिकारियों द्वारा महात्मा गांधी के शांति संदेश के प्रतीक स्वरूप गुब्बारे छोड़े गए।

Kashi Vidyapeeth 106th Foundation Day : संस्थापकों के आदर्शों पर आगे बढ़ने का संकल्प
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. त्यागी ने विश्वविद्यालय के पुरातन छात्रों और महापुरुषों को स्मरण करते हुए कहा कि काशी विद्यापीठ ने देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त और भारत रत्न डॉ. भगवान दास के स्वप्न को साकार करने के लिए हुई थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य भी वही है, जो हमारे संस्थापकों की दूरदर्शिता का परिणाम था। हमें उनके नैतिक, मानवीय मूल्यों और कौशल आधारित शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी में पिरोना है। साथ ही नए पाठ्यक्रम, नए विभाग और शिक्षा के नवीन आयाम स्थापित करने की दिशा में कार्य करना है। कार्यक्रम में शिव प्रसाद गुप्त जी के वंशज डॉ. अंबुज गुप्त एवं डॉ. भगवान दास जी के वंशज प्रो. पुष्कर रंजन की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
Kashi Vidyapeeth 106th Foundation Day : सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति
गांधी अध्ययनपीठ में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत मंच कला विभाग के विद्यार्थियों द्वारा बारहमासा (समूह गायन), युगल गीत एवं मूक अभिनय से हुई। शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारियों के बीच अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें पुरुष टीम का नेतृत्व कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी और महिला टीम का नेतृत्व कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में युगल नृत्य, समूह नृत्य, भारतीय परिधानों की प्रदर्शनी एवं राष्ट्रभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई। डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय एवं ललित कला विभाग के विद्यार्थियों ने पेंटिंग और गायन की जुगलबंदी प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

Kashi Vidyapeeth 106th Foundation Day : स्वर्ण पदक व सम्मान समारोह
स्थापना दिवस के अवसर पर कुलपति प्रो. त्यागी ने विभिन्न विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। नैक द्वारा मूल्यांकित महाविद्यालयों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में मंच कला विभाग के विद्यार्थियों ने होरी की प्रस्तुति दी। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. सुनीता पाण्डेय ने किया। समारोह में समन्वयक प्रो. बंशीधर पाण्डेय, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, परीक्षा नियंत्रक दीप्ति मिश्रा सहित सभी संकायाध्यक्ष, निदेशक एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
Kashi Vidyapeeth 106th Foundation Day : विशेष आकर्षण के रूप में हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी, महामना मदन मोहन मालवीय एवं बाबू शिव प्रसाद गुप्त का जीवंत अभिनय प्रस्तुत किया। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया की प्रभावी झलक ने कार्यक्रम को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया।