Indian Knowledge Tradition : काशी विद्यापीठ में आयोजित शोध पद्धति पाठ्यक्रम के नौवें दिन भारतीय ज्ञान परंपरा, उच्च शिक्षा और निष्पक्ष शोध लेखन पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
Indian Knowledge Tradition : महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर), शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित “सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शोधार्थियों के लिए शोध पद्धति और अकादमिक लेखन” विषयक दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम के नौवें दिन भारतीय ज्ञान परंपरा, उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका, रिपोर्ट लेखन एवं रिपोर्ट प्रस्तुतीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।

Indian Knowledge Tradition : भारतीय ज्ञान परंपरा लोकजीवन से गहराई से जुड़ी – प्रो. सौरभ मालवीय
लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से पधारे प्रो. सौरभ मालवीय ने वैदिक संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सार्वकालिक, जीवंत और व्यवहारिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान लोकजीवन, कला, शिल्प, परंपराओं, रीति-रिवाजों और दैनिक व्यवहार में गहराई से समाहित है। यह परंपरा अनुभव आधारित होने के साथ-साथ व्यावहारिक और सार्वभौमिक भी है। प्रो. मालवीय ने स्पष्ट किया कि शास्त्रीय ज्ञान और लोकज्ञान के समन्वय से ही समाज का समग्र विकास संभव है। भारतीय ज्ञान परंपरा मानव जीवन को संतुलन, नैतिकता और सांस्कृतिक चेतना प्रदान करती है, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है।

Indian Knowledge Tradition : शोध लेखन में निष्पक्षता अनिवार्य- प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी
गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी ने शोध लेखन एवं रिपोर्ट प्रस्तुतीकरण पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत विश्व के अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक समृद्ध और मजबूत है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता शोध के लिए असीम संभावनाएं प्रदान करती है, लेकिन शोधार्थियों को शोध की प्रकृति को भली-भांति समझना होगा। प्रो. त्रिपाठी ने जोर देते हुए कहा कि डाटा संग्रहण, डाटा विश्लेषण, प्रस्तुतीकरण और शोध लेखन पूरी तरह पक्षपात रहित होना चाहिए, तभी शोध की विश्वसनीयता और उपयोगिता बनी रहती है।

Indian Knowledge Tradition : कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम में विषय प्रस्तावना एवं स्वागत पाठ्यक्रम निदेशक एवं संस्थान निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने किया, जबकि संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार सिंह द्वारा किया गया।
Indian Knowledge Tradition : इस अवसर पर डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. प्रभा शंकर मिश्र, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, अरविंद मिश्र, गुरु प्रकाश सिंह, देवेन्द्र गिरि, गणेश राय, आकाश सिंह, सपना तिवारी, डाली विश्वकर्मा, अतुल उपाध्याय, पुलकित, स्तुति, समर, मनीष, हर्ष सहित अनेक शोधार्थी उपस्थित रहे।