Research Methodology Workshop : शोध में शोध दर्शन का उल्लेख अनिवार्य : प्रो. रजनीश रत्ना

Research Methodology Workshop : काशी विद्यापीठ में आईसीएसएसआर प्रायोजित शोध पद्धति पाठ्यक्रम के छठवें दिन शोध दर्शन, अवलोकन, प्रकाशन प्रक्रिया एवं लाइब्रेरी-ई लाइब्रेरी प्रशिक्षण पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिया।

पुस्तकालय ही ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का जीवंत उदाहरण : प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह

Research Methodology Workshop : महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित दस दिवसीय शोध पद्धति एवं अकादमिक लेखन पाठ्यक्रम के छठवें दिन शनिवार को इंपैक्ट फैक्टर, इंडेक्सिंग, प्रकाशन प्रक्रिया, पुस्तकालय एवं ई-पुस्तकालय प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए गए।

Research Methodology Workshop : डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित कार्यशाला के प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, रोहतास (बिहार) के प्रो. रजनीश रत्ना ने “शोध में अवलोकन, शोध के प्रकार एवं केस स्टडी” विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि शोध में शोध दर्शन (Research Philosophy) का उल्लेख अनिवार्य होना चाहिए, क्योंकि यही शोध की वैचारिक आधारशिला तय करता है। शोध के प्रकार के अनुसार ही शोध पद्धति का चयन करना चाहिए।

प्रो. रजनीश रत्ना ने अवलोकन को वैज्ञानिक दृष्टि से किसी विशेष घटना को समझने की प्रक्रिया बताया और कहा कि शोध केवल देखने मात्र से नहीं होता, बल्कि सूक्ष्म, सटीक एवं निष्पक्ष अवलोकन आवश्यक है। उन्होंने अवलोकन के प्रकार, उसकी शुद्धता, प्रक्रिया तथा शोध तकनीकों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। साथ ही शोध पत्रिकाओं एवं प्रकाशन मंचों के चयन में बरती जाने वाली सावधानियों पर भी प्रकाश डाला।

Research Methodology Workshop : दूसरे सत्र में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह ने “लाइब्रेरी एवं ई-लाइब्रेरी ट्रेनिंग” विषय पर प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि “किसी भी संस्थान का पुस्तकालय ही वास्तव में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ का सजीव उदाहरण है। पुस्तकालय स्वयं नहीं बोलता, बल्कि सबको बोलने का अवसर देता है।” उन्होंने बताया कि पुस्तकालय शोधार्थियों के लिए ज्ञान का केंद्र होता है, जहां सूचनाएं एक ही स्थान पर सहज रूप से उपलब्ध होती हैं। ई-लाइब्रेरी और डिजिटल संसाधन आज के शोध के लिए अत्यंत उपयोगी हैं और इनके सही उपयोग से शोध की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

Research Methodology Workshop : कार्यशाला के चौथे सत्र में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के डिप्टी पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. वी.के. भारती ने प्रतिभागियों को पुस्तकालय एवं ई-लाइब्रेरी से प्राप्त तथ्यों के प्रयोग तथा संदर्भों के नैतिक और सावधानीपूर्ण उपयोग की जानकारी दी। कार्यक्रम की विषय प्रस्तावना एवं स्वागत पाठ्यक्रम निदेशक एवं संस्थान निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने किया। संचालन नीलू एवं सनी पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया।

Research Methodology Workshop : इस अवसर पर डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. प्रभा शंकर मिश्र, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, अरविंद मिश्र, गुरू प्रकाश सिंह, देवेन्द्र गिरि, गणेश राय, आकाश सिंह, सपना तिवारी, डाली विश्वकर्मा, अतुल उपाध्याय, पुलकित, स्तुति, समर, मनीष, हर्ष आदि उपस्थित रहे।

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