Indian Knowledge Tradition Research Methodology : काशी विद्यापीठ में आयोजित शोध पद्धति पाठ्यक्रम के दूसरे दिन प्रो. गोविन्द सिंह और डॉ. मुंकेश कुमार शुक्ल ने भारतीय ज्ञान परम्परा, शोध पद्धतियां और समावेशी विकास पर विस्तार से विचार रखे।
Indian Knowledge Tradition Research Methodology : समावेशी विकास की नीतियों के निर्माण में सहायक हो शोध : डॉ. मुंकेश कुमार शुक्ल
Indian Knowledge Tradition Research Methodology : महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित दस दिवसीय “सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी शोधार्थियों के लिए शोध पद्धति और अकादमिक लेखन” विषयक शोध पद्धति पाठ्यक्रम के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान परम्परा, शोध पद्धतियां तथा वैज्ञानिक बनाम सामाजिक अनुसंधान विषय पर विस्तार से व्याख्यान आयोजित किया गया।
Indian Knowledge Tradition Research Methodology : डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित कार्यशाला के प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता उत्तराखंड सरकार के मीडिया सलाहकार एवं भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व डीन (एकेडमी) प्रो. गोविन्द सिंह रहे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह परम्परा स्थूल से सूक्ष्म की ओर अग्रसर होती है। प्रो. सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वजों से अर्जित ज्ञान—वेद, वेदांग, उपनिषद, पुराण और दर्शन—को पश्चिमी ज्ञान परम्परा की भांति ही समभाव से देखे जाने की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परम्परा शास्त्र से लोक तक विस्तारित है और इसे शोध के माध्यम से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना आज के शोधार्थियों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमें अपने प्राच्य ज्ञान और संस्कृति के प्रति हीन भावना से बाहर निकलना होगा। भारतीय वाचिक ज्ञान परम्परा अत्यंत वैज्ञानिक रही है। शास्त्रार्थ, महाविहार यात्राएं और गुरु-शिष्य परम्परा के माध्यम से ज्ञान की समृद्ध परम्परा विकसित हुई। प्रो. सिंह ने प्राक्-ऐतिहासिक काल के भित्ति चित्रों से लेकर लिपि विकास, श्रुति परम्परा, वैदिक काल तथा बौद्ध और जैन साहित्य तक भारतीय ज्ञान परम्परा की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित किया।

Indian Knowledge Tradition Research Methodology : कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. मुंकेश कुमार शुक्ल ने शोध पद्धतियां और वैज्ञानिक बनाम सामाजिक अनुसंधान विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए समावेशी विकास की नीतियां तैयार करने में सहायक होना चाहिए। शोध विषय का चयन, उसका क्षेत्र, महत्व और परिणाम समाजोन्मुख एवं विकासोन्मुख होना चाहिए। डॉ. शुक्ल ने कहा कि जो समाज में सहज रूप से दिखाई नहीं देता, उसे उजागर करना ही शोध का मूल उद्देश्य है। उन्होंने शोध के विभिन्न प्रकारों की व्याख्या करते हुए विषय चयन में होने वाली सामान्य तकनीकी त्रुटियों की ओर ध्यान आकृष्ट किया। साथ ही शोध लेखन में पारिभाषिक शब्दावली के उचित प्रयोग, अनुसंधान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और अकादमिक अनुशासन पर भी विस्तार से चर्चा की।

Indian Knowledge Tradition Research Methodology : कार्यक्रम में स्वागत संबोधन पाठ्यक्रम निदेशक एवं महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने किया, जबकि संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय द्वारा किया गया।
Indian Knowledge Tradition Research Methodology : इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक अनिरुद्ध पाण्डेय, विजय कुमार सिंह, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. वैष्णवी शुक्ला, अरविंद मिश्र, गुरु प्रकाश सिंह, देवेन्द्र गिरि, गणेश राय, आकाश सिंह, सपना तिवारी, डाली विश्वकर्मा, अतुल उपाध्याय, पुलकित, स्तुति, समर, मनीष, हर्ष सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
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