BHU CRP Sensor : बीएचयू के वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक CRP सेंसर विकसित किया है, जो मात्र 10 सेकंड में हार्ट अटैक के खतरे की पहचान कर सकता है। यह तकनीक हृदय रोगों की समय पर जांच में क्रांतिकारी साबित होगी।
BHU CRP Sensor : देश में तेजी से बढ़ते हृदय रोग और साइलेंट हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाओं के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक इम्पेडिमेट्रिक CRP सेंसर विकसित किया है, जो मात्र 10 सेकंड में हार्ट अटैक के खतरे की पहचान करने में सक्षम है। यह सेंसर रक्त में मौजूद सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) के स्तर को बेहद कम मात्रा में भी पहचान सकता है। CRP को हृदय रोगों का एक प्रमुख बायोमार्कर माना जाता है, जिसकी मात्रा बढ़ने पर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

BHU CRP Sensor : बेहद कम स्तर पर भी करेगा सटीक पहचान
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नैनो-आधारित सेंसर 0.5 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर जैसे अत्यंत कम स्तर पर भी CRP की पहचान कर सकता है। यह सेंसर 0.5 से 400 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर तक के स्तर को मापने में सक्षम है, जिससे सामान्य व्यक्ति से लेकर उच्च जोखिम वाले मरीजों तक की जांच आसानी से हो सकेगी। अब तक CRP जांच के लिए जो पारंपरिक विधियां उपयोग में लाई जाती थीं, वे महंगी, समय-साध्य और जटिल थीं। वहीं यह नया सेंसर तेज, सटीक और किफायती साबित हो सकता है।
BHU CRP Sensor : आर्टिफिशियल एंटीबॉडी तकनीक का इस्तेमाल

इस सेंसर की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल की गई मॉलिक्यूलर इम्प्रिंटेड पॉलिमर (MIP) तकनीक है, जिसे आर्टिफिशियल एंटीबॉडी भी कहा जाता है। यह तकनीक CRP अणुओं को चुनिंदा तरीके से पहचानने और पकड़ने में सक्षम है। इसके साथ ही सेंसर में बिस्मथ-युक्त कोबाल्ट फेराइट नैनोकणों का उपयोग किया गया है, जो इसकी संवेदनशीलता को और अधिक बढ़ाते हैं। इस सेंसर को इंडियम टिन ऑक्साइड (ITO) इलेक्ट्रोड पर इलेक्ट्रोफोरेटिक डिपोजिशन प्रक्रिया के माध्यम से विकसित किया गया है। इसमें 4-नाइट्रोफेनिल मेथाक्रायलेट जैसे विशेष कार्यात्मक मोनोमर और क्रॉस-लिंकर का उपयोग किया गया है।
BHU CRP Sensor : भारत में हृदय रोग से लड़ाई में बड़ा हथियार
भारत में हृदय रोग मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुके हैं। समय पर लक्षण न पहचान पाने के कारण बड़ी संख्या में लोग साइलेंट हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेंसर प्रारंभिक जांच और समय रहते इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। अगर यह तकनीक बाजार में आती है, तो क्लिनिक, अस्पताल और पैथोलॉजी लैब्स में हार्ट अटैक के जोखिम का आकलन बेहद आसान, तेज और सस्ता हो जाएगा।
BHU CRP Sensor : अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
इस महत्वपूर्ण शोध को यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल “Journal of Materials Chemistry B” में प्रकाशित किया गया है। शोध टीम में बीएचयू के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. जय सिंह, सैम हिगिनबाटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज की डॉ. नीलोत्पमा सिंह, तथा शोधार्थी सिद्धिमा सिंह और आस्था सिंह शामिल हैं।